विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी भारत में है, लेकिन चुनाव में उम्मीदवार बनाने की बात आती है, तो युवाओं पर विश्वास नहीं दिखाया जाता. गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों मेें करीब 500 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. इनमें 35 साल से कम उम्र के केवल 25 युवा उम्मीदवार थे, जीत केवल आठ की हुई. देश के लोकतंत्र को एक बात समझनी होगी कि सुधार और प्रगति की ताकत युवाओं में ज्यादा है.
इसे सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र के संस्थान बहुत अच्छी तरह समझ चुके हैं और इसका लाभ भी ले रहे हैं. लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी इसे स्वीकार करना होगा. राजनीति छोड़, देश के हर क्षेत्र में युवाओं के कारण ही तरक्की का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में सोचना चाहिए कि जो युवा देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रहे हैं, वे देश की राजनीति व्यवस्था में भी सुधार ला सकते हैं. बस, जरूरत है उन पर विश्वास दिखाने की.
मनीषा चंदराणा, ई-मेल से.
