एक सरकारी नौकरी के पीछे हजारों युवा क्यों? भारत में Government Job की भूख की असली कहानी

लाखों युवा सरकारी नौकरी के लिए सालों तैयारी करते हैं, लेकिन सीटें सीमित हैं और परीक्षा विवाद लगातार बढ़ रहे हैं. आखिर ऐसा क्या है जो सरकारी नौकरी को आज भी युवाओं की पहली पसंद बनाए हुए है?

सुबह के पांच बजे हैं.

झारखंड के एक छोटे से शहर में एक कमरा खुलता है. टेबल पर किताबें हैं, दीवार पर टाइम-टेबल चिपका है और मोबाइल में एक ही चीज बार-बार चेक हो रही है- 'नई वैकेंसी आई क्या?'

यह कहानी सिर्फ एक उम्मीदवार की नहीं है.

आज देश के लाखों युवा सरकारी नौकरी की एक-एक सीट के लिए महीनों नहीं, सालों तक तैयारी कर रहे हैं.

क्यों?

क्योंकि भारत में सरकारी नौकरी अब सिर्फ नौकरी नहीं रह गई है. यह स्थिर भविष्य, सामाजिक सम्मान, नियमित आय और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक बन चुकी है.

लेकिन दूसरी तरफ सरकारी नौकरियां सीमित हैं.

और यहीं से शुरू होती है असली कहानी- कम सीटें, लाखों आवेदन, लंबी परीक्षाएं, पेपर लीक, परीक्षा रद्द, कोर्ट केस और फिर वही तैयारी दोबारा.

500 उम्मीदवार नहीं, 5 लाख उम्मीदवार

झारखंड का हालिया उदाहरण इस संकट को समझने के लिए काफी है.

एक सरकारी भर्ती में 5 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों के मुकाबले सिर्फ 583 पद होने की रिपोर्ट सामने आई. यानी मोटे तौर पर एक सीट के लिए सैकड़ों उम्मीदवार.

लेकिन यह सिर्फ झारखंड की कहानी नहीं है.

UPSC हो, SSC हो, रेलवे हो, बैंकिंग हो, पुलिस भर्ती हो या राज्य PSC- एक सरकारी विज्ञापन सामने आते ही लाखों युवा आवेदन करते हैं.

इनमें से ज्यादातर जानते हैं कि चयन की संभावना बहुत कम है.

फिर भी वे फॉर्म भरते हैं.

क्योंकि दूसरा विकल्प क्या है?

सरकारी नौकरी इतनी आकर्षक क्यों है?

सरकारी नौकरी की लोकप्रियता को सिर्फ सरकारी नौकरी की मानसिकता कहकर समझना आसान है, लेकिन कहानी इससे कहीं बड़ी है.

1. नौकरी की सुरक्षा

Private sector में नौकरी बदल सकती है, कंपनी बंद हो सकती है या restructuring हो सकती है.

सरकारी नौकरी में स्थिरता अपेक्षाकृत ज्यादा मानी जाती है.

2. सामाजिक प्रतिष्ठा

छोटे शहरों और कस्बों में सरकारी कर्मचारी होना आज भी सामाजिक status से जुड़ा है.

'बेटा क्या करता है?'

'सरकारी नौकरी में है.'

यह जवाब परिवार की सामाजिक स्थिति बदल देता है.

3. परिवार की सुरक्षा

नियमित वेतन, छुट्टियां, retirement benefits और दूसरी सुविधाएं सरकारी नौकरी को आकर्षक बनाती हैं.

4. Private jobs की असमान उपलब्धता

भारत में बड़ी संख्या में युवा graduate हो रहे हैं, लेकिन हर graduate को उसकी योग्यता और अपेक्षा के मुताबिक formal, stable job नहीं मिल रही.

इसलिए सरकारी नौकरी की demand बढ़ती जाती है.

Read more: 'मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?' JPSC/JSSC विवाद से जुड़े सबसे जरूरी 7 सवाल और जवाब

लेकिन असली समस्या सीटों की संख्या से भी बड़ी है

मान लीजिए किसी परीक्षा में 500 पद हैं.

आवेदन आए 5 लाख.

अब परीक्षा होगी.

फिर answer key.

फिर objections.

फिर result.

फिर document verification.

फिर final merit list.

और अगर इसी बीच पेपर लीक या परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लग जाए?

पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है.

यही वह बिंदु है जहां एक युवा की उम्र सिर्फ कैलेंडर पर नहीं बढ़ती.

उसकी opportunity cost भी बढ़ती जाती है.

परीक्षा रद्द होना सिर्फ एक खबर नहीं है

किसी उम्मीदवार के लिए परीक्षा रद्द होने का मतलब केवल यह नहीं कि अब दोबारा exam होगा.

उसके पीछे हो सकता है-

एक साल की तैयारी.

कोचिंग की फीस.

कमाई छोड़कर पढ़ाई.

परिवार का दबाव.

उम्र सीमा का डर.

और सबसे बड़ा सवाल-

'अगर अगली बार भी यही हुआ तो?'

यही डर युवाओं के भीतर frustration पैदा करता है.

Jantar Mantar Protest

पेपर लीक से भरोसे का संकट

Competitive examination की पूरी व्यवस्था एक चीज पर टिकी है- Trust.

उम्मीदवार मानता है कि वह पढ़ेगा, परीक्षा देगा और उसके प्रदर्शन के आधार पर उसका चयन होगा.

लेकिन जब पेपर लीक, cheating, technical glitches या recruitment irregularities की खबरें आती हैं, तो उम्मीदवार के मन में सबसे पहला सवाल उठता है- 'क्या मेहनत सच में पर्याप्त है?'

यहीं परीक्षा का विवाद सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रहता.

यह न्याय और अवसर की समस्या बन जाता है.

और फिर शुरू होता है आंदोलन

जब हजारों उम्मीदवारों को लगता है कि उनकी आवाज नहीं सुनी जा रही, तो आंदोलन शुरू होता है.

पहले सोशल मीडिया पोस्ट.

फिर hashtag.

फिर धरना.

फिर सड़क.

फिर राजनीतिक दलों की एंट्री.

और धीरे-धीरे एक परीक्षा का विवाद युवा असंतोष का राजनीतिक मुद्दा बन सकता है.

यही कारण है कि आज सरकारी भर्ती सिर्फ education policy का विषय नहीं है.

यह politics का भी विषय है.

सरकार के सामने सबसे मुश्किल सवाल

सरकार के लिए स्थिति आसान नहीं है.

अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत है और सरकार परीक्षा रद्द नहीं करती, तो सवाल उठेगा-

'ईमानदार उम्मीदवारों के साथ न्याय कहां है?'

लेकिन अगर पूरी परीक्षा रद्द कर दी जाती है, तो दूसरा सवाल सामने आता है-

'जिन उम्मीदवारों ने बिना किसी गलती के परीक्षा पास की, उनकी गलती क्या थी?'

यानी सरकार के सामने दो competing principles हैं- Exam integrity vs. Candidates' rights

और दोनों को एक साथ बचाना आसान नहीं है.

निजी परीक्षा एजेंसियां भी सवालों के घेरे में

आज कई बड़ी परीक्षाओं के आयोजन में private technology और examination agencies की भूमिका बढ़ी है.

इसका फायदा है- तेजी, technology और बड़े स्तर पर परीक्षा कराने की क्षमता.

लेकिन इसके साथ एक नया सवाल भी आता है- जवाबदेही किसकी होगी?

अगर परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी होती है तो जिम्मेदार कौन?

अगर data leak होता है तो कौन जवाब देगा?

अगर paper security में breach होता है तो किसकी liability होगी?

और सबसे महत्वपूर्ण-

क्या एक private agency को सरकारी भर्ती की पूरी credibility सौंपना सुरक्षित है?

सरकारी नौकरी की scarcity सिर्फ बेरोजगारी की कहानी नहीं

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. भारत में युवा आबादी बहुत बड़ी है.

हर साल लाखों युवा graduate होते हैं.

लेकिन सरकारी नौकरियां सीमित हैं.

इसका मतलब यह नहीं कि हर graduate को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए.

लेकिन सवाल यह जरूर है कि-

क्या economy इतनी quality private और formal employment पैदा कर रही है कि युवा सरकारी नौकरी को लेकर इतना desperate न हों?

अगर जवाब कमजोर है, तो सरकारी नौकरी की competition लगातार बढ़ती जाएगी।

एक सीट के पीछे हजारों उम्मीदवार क्यों खड़े हैं?

क्योंकि कहानी सिर्फ नौकरी की नहीं है.

यह सुरक्षा की तलाश है.

यह सामाजिक mobility की तलाश है.

यह परिवार को आर्थिक रूप से ऊपर उठाने की कोशिश है.

और कई युवाओं के लिए यह उस शिक्षा का अंतिम reward है, जिसमें उन्होंने 15-20 साल लगाए हैं.

इसीलिए जब कोई परीक्षा रद्द होती है, तो केवल एक परीक्षा नहीं टूटती.

एक उम्मीद भी टूटती है.

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क्या इसका समाधान सिर्फ और सरकारी नौकरी है?

शायद नहीं. सरकारें ज्यादा पद निकाल सकती हैं.

लेकिन सरकारी क्षेत्र हर युवा को नौकरी नहीं दे सकता.

इसलिए लंबी अवधि का समाधान तीन दिशाओं में दिखाई देता है-

  1. पहला—भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा. पेपर security, technology, audit और accountability को मजबूत करना होगा.
  2. दूसरा—तेज recruitment. वैकेंसी से appointment तक वर्षों का समय नहीं लगना चाहिए.
  3. तीसरा—private employment को मजबूत करना. अगर युवाओं के पास अच्छी salary, career growth और job security वाली private opportunities बढ़ती हैं, तो सरकारी नौकरी के लिए असामान्य competition भी कम हो सकता है.

आखिर में सवाल एक परीक्षा का नहीं है

झारखंड से लेकर दिल्ली तक सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की कहानी एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है-

भारत का युवा आखिर सरकारी नौकरी के पीछे इतना भाग क्यों रहा है?

क्या इसलिए कि सरकारी नौकरी बहुत अच्छी है?

या इसलिए कि बाकी विकल्प अभी उतने भरोसेमंद नहीं हैं?

शायद असली जवाब दोनों के बीच कहीं है।

लेकिन एक बात साफ है-

जब एक सरकारी पद के लिए हजारों युवा कतार में खड़े हों, परीक्षा में गड़बड़ी हो और फिर पूरी प्रक्रिया वर्षों तक अटक जाए, तो समस्या सिर्फ recruitment system की नहीं रहती.

वह देश की employment economy और युवाओं के भरोसे, दोनों की परीक्षा बन जाती है.

और यही वजह है कि अगली बार जब किसी सरकारी भर्ती का विज्ञापन निकले और लाखों युवा उसका फॉर्म भरें, तो सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए-

'कितनी वैकेंसी है?'

सवाल यह भी होना चाहिए-

“क्या इस बार सिस्टम पर भरोसा किया जा सकता है?”


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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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