राहुल गांधी ने महिला आरक्षण अधिनियम की पहेली का जवाब 16 क्यों बताया, आइए समझें

Puzzle of 16 : महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक पर आयोजित चर्चा में भाग लेते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक से जुड़ी एक पहेली का जिक्र किया है. यह पहेली 16 अंकों से जुड़ी है. राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान यह कहा कि यह बिल 16 अप्रैल को पेश हुआ है, मैंने जब अपने फोन पर तारीख देखी, तो यह समझ गया कि इस बिल का पास कराने की कोशिश एक गलती है. आइए समझते हैं क्या है इस पहेली का अर्थ?

Puzzle of 16 : विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि My god, how crazy!’ That’s the number. Sixteen. उनके इन शब्दों के पीछे छिपे राज को जानने के लिए सब परेशान हैं और यह समझना चाह रहे हैं कि आखिर राहुल कहना क्या चाह रहे हैं.

क्या है 16 की पहेली

जब राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान कहा कि हे भगवान, कितना अजीब है… जवाब है 16, तो वे साफ शब्दों में अपनी बात ना रखकर संकेतों में रख रहे हैं. दरअसल राहुल गांधी यह कहना चाह रहे हैं कि बीजेपी की सरकार बहुमत में नहीं है. बीजेपी के पास 240 सांसद हैं और बहुमत का आंकड़ा 272 है. इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए बीजेपी को टीडीपी के 16 सांसदों की जरूरत होती है. महिला आरक्षण के लिए जो परिसीमन होना है, उसका सबसे अधिक विरोध दक्षिण में हो रहा है. दक्षिण की पार्टियां यह कह रही हैं कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ, तो उनका प्रतिनिधित्व देश की राजनीति में कम हो जाएगा, इसलिए वे परिसीमन का विरोध कर रहे हैं. राहुल गांधी यह उम्मीद जता रहे हैं कि संभवत: इस मुद्दे को लेकर टीडीपी जो एनडीए का हिस्सा है, वो महिला आरक्षण अधिनियम संशोधन बिल पर सरकार का साथ ना दे.

सरकार को कमजोर बताकर उनपर दबाव बना रहे हैं राहुल गांधी

राहुल गांधी ने 16 शब्द का प्रयोग किया है. संशोधन विधेयक 16 तारीख को पेश हुआ है और बीजेपी की प्रमुख सहयोगी टीडीपी की संख्या भी लोकसभा में 16 है. दक्षिण भारत के लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, इस लिहाज से संभव है कि टीडीपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार का साथ ना दें. बस इसी बात को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी सरकार को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि आप कमजोर हैं और आपके सहयोगी आपके साथ नहीं हैं. यह एक तरह से उनकी दबाव की राजनीति है, जिसका जवाब 16 में छिपा है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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