कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों? बने पंजाब भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष, 2027 विस चुनाव से पहले बीजेपी ने क्या दांव खेला?

Kewal Singh Dhillon BJP Punjab: पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष बने केवल सिंह ढिल्लों लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और दो बार विधायक भी बने. 2027 चुनाव से पहले पार्टी ने सिख नेता पर दांव लगाया है. जानिए उनका राजनीतिक सफर, भाजपा में एंट्री और 2027 चुनाव से पहले क्या है भाजपा की रणनीति.

Kewal Singh Dhillon BJP Punjab: पंजाब बीजेपी की कमान अब केवल सिंह ढिल्लों के हाथों में आ गई है. पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए एक सिख चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. गुरुवार को भाजपा ने चार राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए, इनमें पंजाब सहित दिल्ली, हरियाणा और त्रिपुरा शामिल हैं. लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति करने वाले केवल सिंह ढिल्लों को संगठन और मालवा क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है.

भाजपा ने मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का कार्यकाल जुलाई में खत्म होने से पहले ही नए नेतृत्व पर फैसला कर लिया. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केवल सिंह ढिल्लों के नाम पर सहमति बन चुकी थी और अब आधिकारिक ऐलान भी कर दिया गया है. ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ लगातार पंजाब में सिख चेहरे को आगे लाने की वकालत कर रहे थे. वहीं पंजाब में आरएसएस के प्रभारी मंत्री श्रीनिवासलु भी ढिल्लों के नाम के पक्ष में बताए गए. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी पंजाब में पार्टी कार्यक्रमों के दौरान सिख नेतृत्व को आगे बढ़ाने की बात कर चुके थे.

कौन हैं केवल सिंह ढिल्लों?

केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बरनाला जिले के तल्लेवाल गांव के रहने वाले हैं. जाट सिख समुदाय से आने वाले ढिल्लों पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. उनकी पहचान पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी नेताओं में होती रही है. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बरनाला विधानसभा सीट से 2007 और 2012 का चुनाव जीता था. हालांकि 2017 में उन्हें आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गुरमीत सिंह मीत हेयर ने हरा दिया था.

कांग्रेस से निकाले गए, फिर भाजपा में हुए शामिल

2022 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने केवल सिंह ढिल्लों को बरनाला सीट से टिकट नहीं दिया था. इसके बाद पार्टी के साथ उनके रिश्ते लगातार खराब होते गए. फरवरी 2022 में कांग्रेस ने उन्हें कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर कर दिया. कुछ महीने बाद जून 2022 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया. उस समय पंजाब चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कई नेता बीजेपी में शामिल हुए थे. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें पंजाब बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था.

उपचुनाव से भी जुड़ा रहा नाम

2022 में पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के दौरान भी केवल सिंह ढिल्लों का नाम चर्चा में रहा था. यह उपचुनाव भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद सांसद पद से इस्तीफा देने के कारण हुआ था. हालांकि उस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत सिंह मान ने जीत हासिल की थी.

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद क्या बोले ढिल्लों

पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पद संभालने के बाद चंडीगढ़ में कहा कि उनकी राजनीति का तरीका भाषण, शायरी या नाटकीय अंदाज नहीं, बल्कि मेहनत है. उन्होंने कहा, ‘मुझे न चुटकुले सुनाने आते हैं, न शायरी और न ही ड्रामा करना आता है. मैं सिर्फ मेहनत करना जानता हूं. मेहनत के दम पर ही हमें पंजाब को आगे ले जाना है.’

ढिल्लों ने दावा किया कि पंजाब की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले समय में राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी. उन्होंने कहा कि लोगों ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों को देख लिया है और अब पंजाब में ‘कमल’ खिलने का समय आ गया है. उनके मुताबिक, अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और राज्य के लोग अब बीजेपी को मौका देने का मन बना चुके हैं.

भाजपा ने सिख चेहरे पर क्यों लगाया दांव?

पंजाब में भाजपा की पारंपरिक राजनीति लंबे समय तक हिंदू वोट बैंक और शहरी क्षेत्रों तक सीमित मानी जाती रही है. लेकिन शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद पार्टी लगातार राज्य में अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही है. नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति से यह साफ हो रहा है कि भाजपा अब पंजाब में सिर्फ शहरी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्रामीण और मालवा बेल्ट में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.

केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने साफ संदेश दिया है कि वह सिख समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. पार्टी को उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी होने की वजह से ढिल्लों मालवा क्षेत्र में भाजपा के लिए नया समर्थन आधार तैयार कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें:- भाजपा ने चार राज्यों में बदले प्रदेश अध्यक्ष, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में इन्हें मिली जिम्मेदारी

ये भी पढ़ें:- जून में 77 ट्रेनें कैंसिल, दुरंतो और ज्ञानेश्वरी जैसे VIP ट्रेनों के रूट बदले, देखें प्रभावित ट्रेनों की पूरी लिस्ट

कौन-कौन थे प्रदेश अध्यक्ष की रेस में?

केवल सिंह ढिल्लों के अलावा कई बड़े सिख नेताओं के नाम भी प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में चर्चा में रहे. इनमें मनजीत सिंह राय, जगमोहन राजू, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा था.  पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू और मौजूदा समय में केंद्र सरकार में मंत्री का नाम इनमें सबसे आगे था. हालांकि आखिरकार भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए केवल सिंह ढिल्लों पर भरोसा जताया.

2027 चुनाव पर भाजपा की नजर

पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है. ऐसे में भाजपा अभी से संगठन को मजबूत करने, पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और नए सामाजिक समीकरण बनाने में जुट गई है. पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि कांग्रेस में लंबे समय तक संगठन संभालने का अनुभव रखने वाले केवल सिंह ढिल्लों बीजेपी के कैडर नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >