कब वापस ले रहे हैं POK? कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी का गृहमंत्री अमित शाह से सवाल

कब वापस ले रहे हैं POK? कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने गृहमंत्री अमित शाह से यह सवाल किया है. शीतकालीन सत्र में भाग लेने संसद पहुंचे कांग्रेस नेता ने तंज भरे शब्दों में यह बात कही है.

भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को निरस्त करने पर 11 दिसंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिसपर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ रही है. ताजा बयान कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी का आया है. संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने पहुंचे कांग्रेस नेता ने अमित शाह से POK को लेकर सवाल किया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा है कि शायद पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू गृह मंत्री अमित शाह जितने जानकार नहीं थे. मैं अमित शाह से पूछना चाहता हूं…चूंकि आप जो भी करते हैं वह सही है, आप पीओके कब वापस ले रहे हैं?

न्यूज एजेंसी एएनआई ने तो वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जारी किया है उसमें कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी कहते नजर आ रहे हैं कि अमित शाह जी को गौर से अध्ययन करना जरूरी है. उस स्थिति में युद्ध विराम जरूरी था. ये हमारे फौज का फैसला था. हो सकता है कि अमित शाह के जैसे उतना ज्ञानी जवाहरलाल नेहरू ना हों…मुझे अमित शाह जी से बस यही कहना है कि सब गलती किये हैं. आप तो सही कर रहे हैं. तो मेरा सवाल है कि पीओके को कब वापस लाओगे…

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पीओके भारत का अभिन्न अंग है और कोई भी इसे छीन नहीं सकता

यहां चर्चा कर दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को देश को आश्वस्त किया कि आतंकवाद से मुक्त ‘नए और विकसित कश्मीर’ के निर्माण की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो चुकी है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का काम किया जाएगा. शाह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) भारत का अभिन्न अंग है और कोई भी इसे छीन नहीं सकता है. इसे बाद से पीओके ट्रेंड में आ चुका है जिसपर लोग सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

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क्या है पीओके जानें यहां

क्या है पीओके ? इस सवाल का जवाब सभी जानना चाहते हैं. बता दें कि साल 1947 में मिली आजादी और बंटवारे से पहले जम्मू-कश्मीर का अस्तित्व एक स्वतंत्र रियासत के तौर पर हुआ करता था, लेकिन 1947 में ही पाकिस्तान की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर जबरन कब्जा कर लिया जो अब तक कायम है. इस क्षेत्र को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर या पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के नाम से जाना जाता है. लेकिन भारत इस क्षेत्र को पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके (POK) कहता है. क्योंकि यह भारत का अभिन्न हिस्सा है.

पता नहीं इन लोगों में नेहरू जी के खिलाफ इतना जहर क्यों है

इधर, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि पता नहीं इन लोगों में नेहरू जी के खिलाफ इतना जहर क्यों है… जब ये आर्टिकल(370) आया था, उस वक्त यहां सरदार पटेल थे, जवाहर लाल नेहरू अमेरिका में थे और जो कैबिनेट की बैठक हुई थी उसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी थे. उस समय इसका फैसला हुआ था… हम चाहते हैं कि चुनाव हो..

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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