क्या गैर-नागरिकों को भी मिल सकता है भारतीय पासपोर्ट? जानिए क्या कहता है पासपोर्ट अधिनियम 1967

Passports Act 1967: विदेश मंत्रालय के बयान के बाद पासपोर्ट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. जिसमें बताया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है. सोशल मीडिया पर यूजर पूछ रहे हैं कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है, तो फिर असली सबूत क्या है? इस मुद्दे पर बीजेपी और विपक्षी दल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. इस बहस को समझने के लिए पासपोर्ट अधिनियम 1967 को समझना होगा.

Passports: सोशल मीडिया पर बहस छिड़ने के बाद सरकार ने साफ कर दिया है कि मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों में पासपोर्ट को लेकर कोई नया फैसला नहीं लिया है. यह कल तय नहीं किया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार सरकार ने बताया- पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट दिया जा सकता है.

क्या है पासपोर्ट अधिनियम 1967 ?

पासपोर्ट अधिनियम 1967 पूरे भारत में विदेश यात्रा और पासपोर्ट से जुड़े नियमों (जैसे पासपोर्ट बनाना, रिन्यू करना या रद्द करना) को संभालता है. इस कानून में एक विशेष नियम है कि सरकार जरूरत पड़ने पर किसी विदेशी या गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा से जुड़े दस्तावेज दे सकती है. इसी वजह से पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं माना जाता. पासपोर्ट आपकी पहचान और विदेश यात्रा के लिए एक जरूरी दस्तावेज है, जो यह तो दिखाता है कि आप नागरिक हो सकते हैं, लेकिन आपकी असली नागरिकता देश के संविधान और नागरिकता कानून (Citizenship Act) से तय होती है, किसी एक पासपोर्ट से नहीं.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 में क्या दिया था फैसला?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 में अपने फैसले में यह स्पष्ट किया था कि भारत में किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ (The Citizenship Act, 1955) के तहत तय होती है. निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, बल्कि सिर्फ पहचान का दस्तावेज है.

पीआईबी ने 20 दिसंबर 2019 को नागरिकता को लेकर दिया था जवाब

20 दिसंबर 2019 को सरकार की संस्था पीआईबी (PIB) ने एनआरसी और सीएए से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब दिए थे. उन्होंने बताया था कि कोई भी व्यक्ति अपनी जन्म तिथि और जन्म के स्थान का प्रमाण देकर अपनी नागरिकता साबित कर सकता है. पीआईबी ने यह भी साफ किया कि भारत में नागरिकता देने या तय करने का काम नागरिकता नियम 2009 के तहत होता है, जो कि हमारे मूल नागरिकता कानून 1955 पर बने हैं.

पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय ने क्या दिया था बयान

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने 24 जून पासपोर्ट सेवा दिवस के दिन बयान दिया कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं. यह ऐसा दस्तावेज नहीं है जो नागरिकता साबित करता हो. बयान सामने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने इस मामले पर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने एक्स पर कहा, तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का साक्ष्य है? बीएलओ मेरी नागरिकता पर शक कर सकता है, मुझे वोट देने से रोक सकता है. नतीजा : भाजपा चुनाव जीत जाती है.

भाजपा नेता अमित मालवीय ने क्या कहा?

भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने कोई नई नीति घोषित नहीं की है, बल्कि केवल एक स्थापित कानूनी स्थिति को दोहराया है. एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि भारतीय अदालतों ने बार-बार यह माना है कि पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है, और 2013 के बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले और बाद के उन कथनों का हवाला दिया है जिनमें कहा गया है कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत पात्रता और सहायक साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है.

महुआ मोइत्रा ने सरकार पर कसा तंज

तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर सरकार पर तंज कसा. उन्होंने एक्स पर कहा, ऐसा लगता है कि आज भारतीय नागरिकता का एकमात्र सबूत हिंदू और भाजपा का मतदाता होना है. इसके अलावा और कुछ नहीं चलेगा.

गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के बयान को बताया बेतुका

गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण को बेतुका बताया. उन्होंने एक्स पर कहा, विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं. सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज पूरी तरह आश्वस्त हुए बिना दे रहे हैं कि यह व्यक्ति भारतीय नागरिक है?? यह बेतुका है.

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By Arbindkumar Mishra

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