महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल! बैठक से पहले बोले संजय राउत- हम ईडी-सीबीआई की धमकियों से डरने वाले नहीं

यह इमरजेंसी मीटिंग ऐसे समय बुलाई गई है, जब एक दिन पहले खबर आई थी कि उद्धव सेना के बागी नेताओं ने पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों का समर्थन होने का दावा किया है.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) गुरुवार (18 जून) को अपने सांसदों की एक अहम बैठक करने जा रही है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब पार्टी में एक और टूट की अटकलें तेज हैं. खबर है कि कुछ बागी सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ जाने की तैयारी में हैं. इस खबर के सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. इतना ही नहीं खबर है कि बागी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी संपर्क किया है.

बैठक के पहले दिल्ली में एएनआई से बातचीत के दौरान शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि सामने वाले सोचते हैं कि एक बार जो किया, वह फिर कर लेंगे, लेकिन इस बार ऐसा करके दिखाएं. राउत ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे हमारी पार्टी नहीं तोड़ पाए तो हम अपने पिता का नाम बताने लायक नहीं रहेंगे, और हमारे पिता का नाम बालासाहेब ठाकरे है. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र का मजाक बनाया जा रहा है और पैसे के दम पर राजनीति की जा रही है. साथ ही कहा कि ईडी-सीबीआई की धमकियों से वे डरने वाले नहीं हैं. राउत ने कहा कि वे पहले भी जेल जा चुके हैं और जरूरत पड़ी तो फिर जेल जाने को तैयार हैं, लेकिन उससे पहले विरोधियों को सबक सिखाएंगे.

9 सांसदों को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक में बुलाया गया

2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए उद्धव ठाकरे खेमे ने अपने सभी 9 सांसदों को 11 बजे दिल्ली में होने वाली अहम बैठक में बुलाया है. पार्टी ने तीन-लाइन व्हिप भी जारी किया है और सभी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से बैठक में मौजूद रहने का निर्देश दिया है. पार्टी की ओर से साफ चेतावनी दी गई है कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे में सभी सांसदों पर बैठक में मौजूद रहने का दबाव बढ़ गया है.

चार साल बाद फिर टूट का खतरा

यह अहम बैठक तय कर सकती है कि उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय पार्टी पर पकड़ बनाए रख पाते हैं या उन्हें एक और बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ता है. 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने महा विकास आघाड़ी सरकार गिरा दी थी, और अब चार साल बाद पार्टी के सामने फिर से टूट का खतरा मंडराता दिख रहा है. अटकलों को और हवा तब मिली, जब सूत्रों ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ बागी सांसदों ने बुधवार (17 जून) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनौपचारिक मुलाकात की.

यह भी पढ़ें : उद्धव की शिवसेना में फूट की अटकलें: UBT सांसदों ने ओम बिरला से की मुलाकात

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब शिवसेना सूत्रों ने दावा किया कि दिल्ली में एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में बेहद सुनियोजित तरीके से “ऑपरेशन टाइगर” चलाया गया. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे अब मुंबई लौट चुके हैं, लेकिन उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है.

पूरा ऑपरेशन बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरा

सूत्रों का दावा है कि यह पूरा ऑपरेशन बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरा कर लिया गया. हालांकि, सांसदों की औपचारिक एंट्री को जानबूझकर दो से तीन दिनों के लिए टाल दिया गया है. बताया जा रहा है कि ऐसा कानूनी और तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच-पड़ताल करने के लिए किया गया है, ताकि आगे किसी तरह की दिक्कत न आए.

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Published by: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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