उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) गुरुवार (18 जून) को अपने सांसदों की एक अहम बैठक करने जा रही है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब पार्टी में एक और टूट की अटकलें तेज हैं. खबर है कि कुछ बागी सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ जाने की तैयारी में हैं. इस खबर के सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. इतना ही नहीं खबर है कि बागी नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी संपर्क किया है.
बैठक के पहले दिल्ली में एएनआई से बातचीत के दौरान शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि सामने वाले सोचते हैं कि एक बार जो किया, वह फिर कर लेंगे, लेकिन इस बार ऐसा करके दिखाएं. राउत ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे हमारी पार्टी नहीं तोड़ पाए तो हम अपने पिता का नाम बताने लायक नहीं रहेंगे, और हमारे पिता का नाम बालासाहेब ठाकरे है. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र का मजाक बनाया जा रहा है और पैसे के दम पर राजनीति की जा रही है. साथ ही कहा कि ईडी-सीबीआई की धमकियों से वे डरने वाले नहीं हैं. राउत ने कहा कि वे पहले भी जेल जा चुके हैं और जरूरत पड़ी तो फिर जेल जाने को तैयार हैं, लेकिन उससे पहले विरोधियों को सबक सिखाएंगे.
9 सांसदों को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक में बुलाया गया
2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए उद्धव ठाकरे खेमे ने अपने सभी 9 सांसदों को 11 बजे दिल्ली में होने वाली अहम बैठक में बुलाया है. पार्टी ने तीन-लाइन व्हिप भी जारी किया है और सभी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से बैठक में मौजूद रहने का निर्देश दिया है. पार्टी की ओर से साफ चेतावनी दी गई है कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे में सभी सांसदों पर बैठक में मौजूद रहने का दबाव बढ़ गया है.
चार साल बाद फिर टूट का खतरा
यह अहम बैठक तय कर सकती है कि उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय पार्टी पर पकड़ बनाए रख पाते हैं या उन्हें एक और बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ता है. 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत ने महा विकास आघाड़ी सरकार गिरा दी थी, और अब चार साल बाद पार्टी के सामने फिर से टूट का खतरा मंडराता दिख रहा है. अटकलों को और हवा तब मिली, जब सूत्रों ने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ बागी सांसदों ने बुधवार (17 जून) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनौपचारिक मुलाकात की.
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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब शिवसेना सूत्रों ने दावा किया कि दिल्ली में एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में बेहद सुनियोजित तरीके से “ऑपरेशन टाइगर” चलाया गया. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे अब मुंबई लौट चुके हैं, लेकिन उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है.
पूरा ऑपरेशन बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरा
सूत्रों का दावा है कि यह पूरा ऑपरेशन बिना किसी बड़ी रुकावट के पूरा कर लिया गया. हालांकि, सांसदों की औपचारिक एंट्री को जानबूझकर दो से तीन दिनों के लिए टाल दिया गया है. बताया जा रहा है कि ऐसा कानूनी और तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच-पड़ताल करने के लिए किया गया है, ताकि आगे किसी तरह की दिक्कत न आए.
