क्या है बिलकीस बानो केस, SC के फैसले पर राहुल गांधी का बीजेपी पर कटाक्ष, बताया- अपराधियों का संरक्षक

बिलकिस बानो से गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद 2002 में भड़के दंगों के दौरान दुष्कर्म किया गया था. दंगों में मारे गए उनके परिवार के सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी. घटना के वक्त बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच माह की गर्भवती थीं.

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो केस में बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष कोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार लगाते हुए 11 दोषियों को सजा से छूट देने के फैसले का रद्द कर दिया और उन्हें दो सप्ताह के अंदर जेल में डालने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बीजेपी पर कटाक्ष किया है. उन्होंने बीजेपी को अपराधियों का संरक्षक बताया.

बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या बोले राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिलकीस बानो मामले के दोषियों की सजा में छूट देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद सोमवार को कहा कि इस निर्णय ने एक बार फिर देश को बता दिया कि ‘अपराधियों का संरक्षक’ कौन है. राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, चुनावी फायदे के लिए ‘न्याय की हत्या’ की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है. आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर देश को बता दिया कि ‘अपराधियों का संरक्षक’ कौन है. कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बिलकीस बानो का अथक संघर्ष, अहंकारी भाजपा सरकार के विरुद्ध न्याय की जीत का प्रतीक है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार पर की शख्स टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो मामले में फैसला सुनाते हुए गुजरात सरकार पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि सजा में छूट का गुजरात सरकार का आदेश बिना सोचे समझे पारित किया गया और पूछा कि क्या महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध के मामलों में सजा में छूट की अनुमति है, चाहे वह महिला किसी भी धर्म या पंथ को मानती हो.

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क्या है बिलकिस बानो केस?

बिलकिस बानो से गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद 2002 में भड़के दंगों के दौरान दुष्कर्म किया गया था. दंगों में मारे गए उनके परिवार के सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी. घटना के वक्त बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच माह की गर्भवती थीं. गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को 15 अगस्त 2022 को सजा में छूट दे दी थी और उन्हें रिहा कर दिया था.

बिलकिस बानो केस में कब-कब क्या-क्या हुआ

  • 3 मार्च, 2002: अहमदाबाद के पास रंधीकपुर गांव में 21 वर्षीय बिलकिस बानो के परिवार पर हिंसक भीड़ ने हमला किया. महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया जबकि उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई.

  • दिसंबर 2003 : सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच का निर्देश दिया.

  • 21 जनवरी, 2008 : एक विशेष अदालत ने बिलकिस बानो से बलात्कार और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई.

  • दिसंबर 2016: बंबई हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा पाए 11 कैदियों की अपील पर फैसला सुरक्षित रखा.

  • मई 2017 : बंबई हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी.

  • 23 अप्रैल, 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से बिलकिस बानो को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने को कहा.

  • 13 मई 2022 : सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया कि वह नौ जुलाई 1992 की अपनी नीति के अनुसार समय पूर्व रिहाई के लिए एक दोषी की याचिका पर विचार करे.

  • 15 अगस्त, 2022: गुजरात सरकार की माफी नीति के तहत गोधरा उप-कारागार से 11 दोषियों को रिहा किया गया.

  • 25 अगस्त, 2022: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की समय पूर्व रिहाई के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की पूर्व सांसद सुभाषिनी अली, पत्रकार रेवती लौल और प्रोफेसर रूप रेखा वर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दायर जनहित याचिका पर केंद्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया.

  • 30 नवंबर, 2022 : बिलकिस बानो ने 11 दोषियों की सजा माफ करने के गुजरात सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और कहा कि उनकी समय पूर्व रिहाई ने समाज की अंतरात्मा को हिला दिया है.

  • 17 दिसंबर, 2022: सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने उससे 13 मई के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि गुजरात सरकार सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के एक दोषी द्वारा दायर समय पूर्व रिहाई के आवेदन की जांच करने में सक्षम है.

  • 27 मार्च, 2023 : बिलकिस बानो की याचिका पर केंद्र, गुजरात सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया गया.

  • 7 अगस्त, 2023: सुप्रीम कोर्ट ने सजा में छूट देने के गुजरात सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की.

  • 12 अक्टूबर, 2023: सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो द्वारा दायर याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर 11 दिन की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा.

  • 08 जनवरी, 2024 : सुप्रीम कोर्ट ने 11 दोषियों की सजा माफी रद्द करते हुए कहा कि आदेश घिसा-पिटा है और बिना सोचे-समझे पारित किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष समर्पण करने का निर्देश दिया.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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