वायनाड भूस्खलन की आंखों देखी: 'देखते ही देखते जमींदोज हो गया सब कुछ'; अब तक 3 की मौत, 7 घायल

वायनाड में अचानक आए भूस्खलन ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया. एक महिला ने उस भयानक पल को बयां किया जब सब कुछ उसकी आंखों के सामने ढह गया. अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है और 7 घायल हैं.

Wayanad Landslide: हादसे में बाल-बाल बचे आशिक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, "वहां पर डंप की गई मिट्टी का एक बहुत बड़ा ढेर था. सुबह करीब 11 बजे अचानक वह पूरा हिस्सा ढह गया और नीचे आ गिरा. संभलने का मौका तक नहीं मिला." घटना के प्रत्यक्षदर्शी अजमल ने उस खौफनाक मंजर को बयां करते हुए बताया, "पहले एक अजीब सी हल्की आवाज आई, जिसे सुनकर हम सब दुकानों से बाहर भागे. शुरुआत में थोड़ी सी मिट्टी खिसकी, लेकिन देखते ही देखते वह एक विशाल भूस्खलन में बदल गया. वहां बस स्टॉप पर लोग खड़े थे और मजदूर भी काम कर रहे थे. हमने चिल्लाकर सबको भागने को कहा. इसी बीच एक टैंकर लॉरी भी मलबे की चपेट में आकर बह गई. आशंका है कि 10 से 15 लोग दब गए हैं."

वायनाड भूस्खलन के बाद का नजारा, फोटो पीटीआई

मुझे नहीं पता कि मैं कैसे बची: भूस्खलन में बची महिला की आंखों देखी

भूस्खलन में बची एक महिला ने बताया, "मैं बस का इंतजार कर रही थी, तभी मैंने एक इमारत को गिरते हुए देखा. मैं जितनी तेजी से भाग सकती थी, भागी, लेकिन भूस्खलन मुझ तक पहुंच ही गया. मैं गिर गई और मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी गाड़ी के नीचे फंस गई हूं. मुझे नहीं पता कि मैं कैसे बची और वहां से कैसे निकली."


9 घायल अस्पताल में भर्ती, खोजी कुत्तों की मदद से रेस्क्यू

प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मलबे से निकाले गए 9 गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल इलाज के लिए मेप्पडी के 'WIIMS' अस्पताल में भर्ती कराया है. प्रभावितों में परियोजना स्थल पर काम कर रहे मजदूर, सुरक्षाकर्मी और सुपरवाइजर शामिल हैं. केरल पुलिस, एनडीआरएफ और स्थानीय आपदा प्रबंधन की कई एजेंसियां संयुक्त रूप से लापता 7 लोगों की तलाश में जुटी हैं. मलबे के नीचे दबे लोगों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए केरल पुलिस के विशेष खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) की मदद ली जा रही है.

मुंडाक्कई और चूरलमाला में राहत शिविर

पुल के दोनों ओर फंसे स्थानीय निवासियों और प्रभावितों के लिए प्रशासन ने त्वरित व्यवस्था की है. मुंडाक्कई वन स्टेशन और चूरलमाला चर्च हॉल में अस्थायी राहत शिविर (शेल्टर) बनाए गए हैं. इसके साथ ही, एराट्टुकुंडु, अट्टामाला, मम्मिक्कुन्नू और अंबेडकर कॉलोनी जैसे बेहद संवेदनशील और संभावित खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष एहतियात बरती जा रही है.

हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग

राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शीर्ष अधिकारियों ने संभाल ली है. कल्लडी में विधायक आईसी बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आपातकालीन समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में विधायक सीके आशा, जिला पंचायत अध्यक्ष चंद्रिका कृष्णन, जिला कलेक्टर डीआर मेघाश्री, जिला पुलिस प्रमुख देवा मनोहर, एडीएम के अजिश और उप-कलेक्टर अतुल सागर सहित तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे, ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई ढिलाई न हो.

सियासी हलचल: केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट पर

केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया, "फिलहाल स्थिति पूरी तरह से केरल सरकार के नियंत्रण में है. केंद्र सरकार पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है. अगर राज्य सरकार को अतिरिक्त सुरक्षा बल या तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होगी, तो हम तुरंत मुहैया कराएंगे. यह हमारा कर्तव्य है." केरल के मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा ने कहा, "आपदा प्रबंधन और वित्तीय सहायता के लिए हमारे पास पर्याप्त फंड और तंत्र मौजूद है. नुकसान की सीमा का पूरा आकलन करने के बाद ही केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग पर विचार किया जाएगा." वहीं कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा- "प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें पूरी ताकत से जुटी हैं. हमारी प्राथमिकता अधिक से अधिक जिंदगियां बचाना है. वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लगातार जिला प्रशासन के संपर्क में हैं और राहत कार्यों की मॉनिटरिंग कर रही हैं."


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By Arbindkumar Mishra

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