Chamoli Disaster: तपोवन टनल में अब भी फंसे हैं लोग, अब तक 36 शव बरामद, 200 लोगो‍ं की तलाश जारी

Chamoli Disaster: जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो पा रही है, उनके डीएनए सैंपल लेकर सुरक्षित रख कर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. अब तक नौ शवों की शिनाख्त कर ली गयी है. इनमें से छह लोग उत्तराखंड और तीन उप्र के रहने वाले थे.

  • उत्तराखंड के चमोली जिले में हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

  • आपदा में मरने वालों की संख्या 36 हो गई है जबकि 169 अन्य लोग अभी भी लापता हैं.

  • टनल में से गाद निकालने के लिए बड़े एक्सेलेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

Chamoli Disaster: उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली जिले में हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. आज बचाव अभियान का छठा दिन है. आपदा में मरने वालों की संख्या 36 हो गई है जबकि 169 अन्य लोग अभी भी लापता हैं. तपोवन सुरंग में पांचवें दिन भी 25 से 35 लोग फंसे हुए है.उन्हें निकालने का प्रयास जारी है. सुरंग में गाद के कारण बचाव अभियान में दिक्कतें आ रही हैं. अब गाद निकालने के लिए बड़े एक्सेलेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

गुरुवार को ऋषिगंगा का जलस्तर अचानक बढ़ जाने और सुरंग से भारी मात्रा में पानी के रिसाव के कारण बचाव कार्य को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा. गुरुवार को तीन और शव मिले. दो शव अलकनंदा किनारे गलनाऊं के पास और एक शव जिलासू के पास मिला. वहीं, चार शवों और सात मानव अंगों का अंतिम संस्कार किया गया.

शवों के लिये गये डीएनए सैंपल

जिन शवों की शिनाख्त नहीं हो पा रही है, उनके डीएनए सैंपल लेकर सुरक्षित रख कर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. अब तक नौ शवों की शिनाख्त कर ली गयी है. इनमें से छह लोग उत्तराखंड और तीन उप्र के रहने वाले थे. 12 मानव अंग क्षत-विक्षत हालत में मिले हैं, जिससे इनकी शिनाख्त नहीं हो पा रही है. सुरंग में फंसे लोगों को ढूंढने के लिए अब ड्रिलिंग की तकनीक अपनायी गयी है.

तपोवन सुरंग में अब भी फंसे हैं कर्मचारी

पहले 75 मिलीमीटर चौड़ाई का होल किया जा रहा था, पर करीब एक मीटर के बाद उसमें दिक्कत आने पर अब करीब 50 मिलीमीटर चौड़ाई का होल किया जा रहा है. इस होल से अंदर कैमरा डाल कर नीचे से गुजर रही दूसरी टनल में वर्कर्स के सुरक्षित होने का पता लगाया जायेगा. राज्य पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि ड्रिलिंग के साथ ही गाद निकालने का काम भी जारी है. वहीं, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राहत व बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा की.

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