कोर्ट की लाइव-स्ट्रीमिंग को बिना इजाजत सोशल मीडिया पर अपलोड करना बैन

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट की लाइव-स्ट्रीमिंग को सोशल मीडिया पर अपलोड करने से रोक दिया है. कोर्ट का कहना है कि इसके लिए अनुमति लेना जरूरी होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट की लाइव-स्ट्रीम की गई कार्यवाही के वीडियो को बिना अनुमति सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना, उसे एडिट करना, शेयर करना, पोस्ट करना और रीपोस्ट करना भी मना है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति आवश्यक होगी.


अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट और सभी हाई कोर्ट अपनी-अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड करें.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश समाचार रिपोर्टिंग पर लागू नहीं होगा और मीडिया की सामान्य रिपोर्टिंग इससे प्रभावित नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही के वीडियो के अनधिकृत उपयोग, प्रसार और उससे कमाई (मॉनेटाइजेशन) पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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