गंगा नदी पर 4.56 किलोमीटर लंबे पुल के निर्माण को केंद्र की मंजूरी, नये साल पर मोदी सरकार ने दिया तोहफा

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, सड़क और परिवहन मंत्रालय से जुड़े निर्णय लिए गए हैं जो त्रिपुरा और असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. खोवाई से हरिना तक सड़क बनाने के काम को मंजूरी दी गई है. 20,487 करोड़ रुपये खर्च होंगे और 25 महीने में इस काम को पूरा किया जाएगा.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नये साल से पहले बिहार को बड़ा तोहफा दिया है. केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बुधवार को कई बड़े फैसले लिए गए. जिसमें मंत्रिमंडल ने गंगा नदी पर 4.56 किलोमीटर लंबे पुल के निर्माण को मंजूरी दी. यह पुल बिहार में दीघा और सोनपुर को जोड़ेगा.

त्रिपुरा और असम के लिए खोवई से हरिना तक के रोड प्रोजेक्ट को कैबिनट की मंजूरी

केंद्रीय कैबिनेट ने त्रिपुरा और असम के लिए खोवई से हरिना तक के रोड प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर कहते हैं, सड़क परिवहन और राजमार्ग से जुड़ा फैसला त्रिपुरा और असम के लिए महत्वपूर्ण है. यह पेव्ड शोल्डर के साथ दो लेन का चौड़ीकरण है…खोवाई से हरिना तक के काम की स्वीकृति मिल गई है.

गंगा नदी पर 6 लेन केबल ब्रिज बनाने का निर्णय

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, बिहार में दीघा से सोनपुर जिले के बीच गंगा नदी पर 6 लेन केबल ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया है. इसे 42 महीने में पूरा किया जाएगा और इसे बनाने में 3,064 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बड़ी बात ये है कि इस पुल के नीचे से बड़े जहाज भी आसानी से आ जा सकेंगे.

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खोवाई से हरिना तक सड़क बनाने में 20,487 करोड़ रुपये होंगे खर्च

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, सड़क और परिवहन मंत्रालय से जुड़े निर्णय लिए गए हैं जो त्रिपुरा और असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. खोवाई से हरिना तक सड़क बनाने के काम को मंजूरी दी गई है. 20,487 करोड़ रुपये खर्च होंगे और 25 महीने में इस काम को पूरा किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर असम और त्रिपुरा के बीच में परिवहन और सुगम हो जाएगा. ये उत्तर त्रिपुरा को दक्षिण त्रिपुरा से जोड़ने का प्रयास है.

गंगा पर नये पुल के बन जाने से होंगे ये लाभ

दीघा और सोनपुर के बीच नये पुल से बाधा दूर होगी. पुल बन जाने के बाद माल और वस्तुओं का परिवहन किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र की आर्थिक क्षमता सही तरीके से उपयोग हो सकेगा. वर्तमान में ये केवल हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए रेल सह सड़क पुल से जुड़े हुए हैं. ऐसे में वर्तमान सड़क का उपयोग माल और वस्तुओं के परिवहन के लिए नहीं किया जा सकता है. यह तेज आवाजाही के रास्ते में एक बड़ी बाधा है.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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