Tirupati Resolution: महिला सशक्तिकरण से सशक्त होगा विकसित भारत

सम्मेलन में ‘तिरुपति संकल्प’ को सर्वसम्मति से अंगीकृत किया गया. इसमें सभी मंत्रालयों और विभागों में लैंगिक दृष्टिकोण लागू करने, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में निवेश बढ़ाने, महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा पर बल देते हुए 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और आत्मनिर्भरता को मूल आधार बताया गया.

Tirupati Resolution: महिला सशक्तिकरण पर संसदीय और विधानमंडलीय समितियों का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को तिरुपति में सम्पन्न हुआ जिसमें डिजिटल विभाजन को समाप्त करने, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने और महिलाओं के लिए समर्पित डिजिटल साक्षरता मिशन पर जोर दिया गया, जिससे महिलाएं तकनीक की उपभोक्ता ही नहीं बल्कि सक्रिय सर्जक बन सकेंगी. सम्मेलन में समलैंगिक उत्तरदायी बजटिंग  प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय विकास की धारा में महिलाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को जोड़ने पर बल देते हुए मंत्रालयों और राज्य विभागों में “जेंडर बजट सेल’ की स्थापना, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्यमिता में महिलाओं के लिए अधिक संसाधन आवंटित करने तथा लैंगिक आंकड़ों के आधार पर नीतियों की निगरानी का सुझाव दिया गया.


इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं का नेतृत्व और योगदान अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को राष्ट्रीय विकास का प्रमुख स्तंभ बताते हुए लैंगिक उत्तरदायी बजटिंग को एक सशक्त सामाजिक-आर्थिक मॉडल के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सामाजिक अनिवार्यता नहीं, बल्कि आर्थिक आवश्यकता है. महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और उद्यमिता में निवेश से भारत की मानव पूंजी को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है. 


लोकसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि महिला-नेतृत्व वाला विकास ही विकसित भारत की असली आधारशिला बनेगा.उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब अवसर मिलते हैं तो ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि की महिलाएं शिक्षा, उद्यमिता और सामुदायिक नेतृत्व में असाधारण सफलता प्राप्त करती हैं. समाज सुधारकों, विशेषकर सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा और समानता के लिए किया गया उनका प्रयास आज भी प्रेरणा देता है. बिरला ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि यहां समानता, संवाद और भागीदारी की परंपरा सदियों से समाज की सांस्कृतिक संरचना का हिस्सा रही है. 

डिजिटल विभाजन को समाप्त करने की जरूरत 


डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों पर बोलते हुए बिरला ने कहा कि महिलाओं को तकनीकी विकास में पीछे नहीं छोड़ा जा सकता. उन्होंने डिजिटल विभाजन को समाप्त करने, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने और महिलाओं के लिए समर्पित डिजिटल साक्षरता मिशन की वकालत की. इससे महिलाएं तकनीक की उपभोक्ता ही नहीं बल्कि सक्रिय सर्जक बन सकेंगी. सम्मेलन के अंत में ‘तिरुपति संकल्प’ को सर्वसम्मति से अंगीकृत किया गया. इसमें सभी मंत्रालयों और विभागों में लैंगिक दृष्टिकोण लागू करने, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में निवेश बढ़ाने, महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा पर बल दिया गया. संकल्प में 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और आत्मनिर्भरता को मूल आधार बताया गया.

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने भी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया. इस सम्मेलन में यह बात स्पष्ट रूप से सभी ने महसूस किया कि भारत की प्रगति तभी पूर्ण होगी जब महिलाएं राष्ट्र निर्माण में समान और सक्रिय भागीदारी निभाएंगी.

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Published by: Anjani kumar singh

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