सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, मुख्यधारा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक मैसेंजर और सिग्नल पर एजेंसियों की कड़ी निगरानी है. इसी से बचने के लिए आतंकी आकाओं ने घाटी के युवाओं को रेडिकलाइज करने और निर्देश देने के लिए इन अश्लील डेटिंग और मैसेजिंग ऐप्स को नया हथियार बनाया है.
वर्चुअल सिम, 2G नेटवर्क और चीनी कनेक्शन
- अश्लील और डेटिंग ऐप्स : इन प्लेटफॉर्म्स पर रियल-टाइम चैटिंग और आसपास के लोगों से मिलने के नाम पर गुप्त चैट रूम्स बनाए जाते हैं. भारत में बैन होने के बावजूद इन्हें वीपीएन (VPN) के जरिए अवैध रूप से डाउनलोड किया जा रहा है.
- बिना नंबर वाले एन्क्रिप्टेड ऐप्स : आतंकी फ्रांस, वियतनाम और चीन के संदिग्ध मूल वाले 'मूनचैट' जैसे ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं. इनमें पंजीकरण के लिए न सिम कार्ड चाहिए, न ही फोन नंबर या ईमेल आईडी. ये ऐप्स 2G या स्लो एज (EDGE) नेटवर्क पर भी आसानी से काम करते हैं.
- टोर और आरएसए-2048 सुरक्षा : कोटेक्स (Cortex) और कोनियन (Conion) जैसे टोर आधारित मैसेजिंग ऐप्स यूजर की पहचान पूरी तरह छिपा देते हैं. इनमें RSA-2048 तकनीक और खुद-ब-खुद मिट जाने वाले (Self-destructing) मैसेज का इस्तेमाल होता है, जिससे डेटा सिर्फ यूजर के फोन पर रहता है और उसका डिजिटल फुटप्रिंट (निशान) गायब हो जाता है.
- वर्चुअल सिम का खेल : सुरक्षा बलों द्वारा विदेशी कंपनियों के वर्चुअल सिम कार्ड पर नकेल कसने के दौरान इस नई साजिश का पता चला. गौरतलब है कि 2019 के पुलवामा हमले में भी जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने 40 से अधिक वर्चुअल सिम का इस्तेमाल किया था.
ये भी पढ़ें: चीन के जनरल झाओ जोंगकी पर गिरी गाज, गलवान हिंसा के मास्टरमाइंड को शी ने किया बर्खास्त
