Diwali: तमिलनाडु के इन गांवों में वर्षों से मनायी जा रही बिना पटाखे की दिवाली, आपको भी होगा गर्व

तमिलनाडु के वेट्टंगुडीपट्टी और पेरिया कोल्लुकुडिपट्टी सहित कई ऐसे गांव हैं जहां की दिवाली पर पूरे देश को गर्व होगा. इन गांवों में दिवाली के मौके पर पटाखे नहीं जलाये जाते. इन गांवों में प्रवासी पक्षियों के कारण दिवाली पर पटाखे नहीं छोड़े जाते.

दिवाली को रोशनी का पर्व माना जाता है. जिसमें दीप जलाने के साथ-साथ पटाखे भी छोड़े जाते हैं. लेकिन प्रर्यावरण और बढ़ते प्रदुषण को देखते हुए कई राज्यों में पटाखे जलाने पर रोक लगा दिया गया है. जिसका जमकर विरोध भी देखा जा रहा है. विरोध में तो कई लोग यह भी कह रहे हैं कि पटाखों के बिना क्या दिवाली. एक ओर पटाखे छोड़ने को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर देश में ऐसे भी गांव हैं जहां वर्षों से पटाखों वाली दिवाली नहीं मनायी गयी.

तमिलनाडु के इन गांव की दिवाली पर होगा गर्व

तमिलनाडु के वेट्टंगुडीपट्टी और पेरिया कोल्लुकुडिपट्टी सहित कई ऐसे गांव हैं जहां की दिवाली पर पूरे देश को गर्व होगा. इन गांवों में दिवाली के मौके पर पटाखे नहीं जलाये जाते. इन गांवों में प्रवासी पक्षियों के कारण दिवाली पर पटाखे नहीं छोड़े जाते. एक स्थानीय ने बताया, मैं 75 साल का हूं और मैंने कभी दिवाली नहीं मनाई क्योंकि यह हमारे पक्षियों का भी घर है. दरअसल ये गांव वेट्टंगुडी पक्षी अभ्यारण्य के करीब हैं.

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तमिलनाड‍ु के इन गांवों में होती है चमगादड़ों की पूजा

तमिलनाडु के थोप्पुपट्टी और सामपट्टी ऐसे गांव हैं, जहां दिवाली के मौके पर पटाखे नहीं जलाये जाते. सुप्रीम कोर्ट में पटाखे पर बैन को फैसला हाल के वर्षों में आया है, लेकिन इन गांवों में वर्षों से पटाखे वाली दिवाली नहीं मनायी जाती, क्योंकि पटाखों की शोर और उससे निकलने वाले धुएं से पक्षियों को परेशानी होती है. इन गांवों में चमगादड़ों की पूजी की जाती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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