तमिलनाडु विधानसभा में कई दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सियासी टक्कर देखने को मिलती रही है. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अगुवाई वाली टीवीके सरकार को एक ऐसे नेता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जो न तो डीएमके से हैं और न ही एआईएडीएमके से. यह विधायक विधानसभा में अकेले हैं और कई अहम मुद्दों पर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं.
234 सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बीजेपी के इकलौते विधायक एम. भोजराजन इन दिनों चर्चा में हैं. मुख्यमंत्री विजय की टीवीके सरकार की ओर से लाए गए कई अहम प्रस्तावों का जहां मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके और डीएमके ने समर्थन किया, वहीं भोजराजन ने इनका विरोध किया. इस तरह वह सदन में सरकार के खिलाफ अकेली आवाज बनकर उभरे. खास बात यह है कि बीजेपी का विधानसभा में उनके अलावा कोई दूसरा विधायक नहीं है.
किन मुद्दों पर तमिलनाडु सरकार का विरोध कर रहे हैं भोजराजन
79 साल के विधायक एम. भोजराजन ऊटी यानी उधगमंडलम विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्होंने कई अहम मुद्दों पर तमिलनाडु सरकार के प्रस्तावों का विरोध किया है. इनमें NEET खत्म करने की मांग, विदेशी चंदे से जुड़े कानून में 2026 के संशोधन को वापस लेने का प्रस्ताव और परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध शामिल है. इन मुद्दों पर विधानसभा में बीजेपी का पक्ष मजबूती से रखने की जिम्मेदारी फिलहाल अकेले भोजराजन के कंधों पर है.
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भोजराजन की भूमिका क्यों हो रही है खास
तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा में एम. भोजराजन की भूमिका इसलिए खास हो जाती है, क्योंकि बीजेपी के वह अकेले विधायक हैं. सदन में टीवीके के 108 विधायक हैं, जबकि डीएमके के 59 और एआईएडीएमके के 47 विधायक हैं. पिछली विधानसभा में बीजेपी के चार विधायक थे, लेकिन इस बार पार्टी की संख्या घटकर सिर्फ एक रह गई है. ऐसे में विधानसभा में बीजेपी की आवाज अब पूरी तरह एम. भोजराजन के जरिए ही उठ रही है.
भोजराजन के बारे में जानें खास बातें
1946 में जन्मे एम. भोजराजन तमिलनाडु की 17वीं विधानसभा के सबसे उम्रदराज सदस्य हैं. नीलगिरी से आने वाले भोजराजन का चाय कारोबार से भी पुराना जुड़ाव रहा है. वह किसान और कारोबारी होने के साथ वकील भी रह चुके हैं. नीलगिरी क्षेत्र में उनका चाय बागानों और चाय से जुड़े कारोबार से संबंध रहा है. खेती, व्यापार और कानून के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव ने उनकी अलग पहचान बनाई है.
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भोजराजन की पढ़ाई भी काफी अलग-अलग क्षेत्रों में रही है. उन्होंने ऊटी के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की और मद्रास मेडिकल कॉलेज से अपराध विज्ञान यानी क्रिमिनोलॉजी में डिप्लोमा किया. शिक्षा के इन अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव उनके व्यक्तित्व और लंबे सार्वजनिक जीवन में भी नजर आता है.
