चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति पर SC ने केंद्र से किया सवाल, कहा- जल्दबाजी में पास किये गये फाइल

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से संबंधित ओरिजनल फाइल को पेश किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने आज पिछले सप्ताह नियुक्त चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से संबंधित फाइल को पढ़ा और कहा कि फाइल को जल्दबाजी में पास किया गया है. कोर्ट ने इस बारे में केंद्र से सवाल भी किया.

कॉलेजियम जैसी व्यवस्था बनाने पर फैसला सुरक्षित

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी व्यवस्था बनाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है और सभी संबधित पक्षों से पांच दिन में लिखित जवाब देने को कहा है. संविधान पीठ के जस्टिस अजय रस्तोगी ने कहा, आपको अदालत को सावधानीपूर्वक सुनना होगा और सवालों का जवाब देना होगा. हम किसी उम्मीदवार पर नहीं बल्कि प्रक्रिया पर सवाल कर रहे हैं.

प्रक्रिया पर उठाये सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी क्या जल्दी थी कि 1985 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गोयल ने एक ही दिन में सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली, एक ही दिन में कानून मंत्रालय ने उनकी फाइल को मंजूरी दे दी, चार नामों की सूची प्रधानमंत्री के समक्ष पेश की गयी तथा गोयल के नाम को 24 घंटे के भीतर राष्ट्रपति से मंजूरी भी मिल गयी.

केंद्र ने संविधान पीठ के समक्ष फाइल पेश किया

केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से संबंधित ओरिजनल फाइल को पेश किया गया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन फाइलों पर गौर किया और कहा कि फाइल बहुत जल्दबाजी में पास किये गये हैं.

19 नवंबर को हुई है नियुक्ति

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्त का पद 15 मई को खाली हुआ था और चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की फाइल को हड़बड़ी में पास करके 19 नवंबर को उनकी नियुक्ति कर दी गयी. महाधिवक्ता ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट से विस्तारपूर्वक विचार करने की अपील की है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए केंद्र सरकार से उनकी नियुक्ति से संबंधित फाइल पेश करने को कहा था.

नियुक्ति में अनियमितता की आशंका

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने यह कहा था कि वह यह जानना चाहती है कि चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति में कहीं कुछ अनुचित कदम तो नहीं उठाया गया है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कल केंद्र सरकार को आज तक का समय फाइल पेश करने के लिए दिया था. हालांकि केंद्र ने यह दावा किया है कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सब चीज ठीक है.

1985 बैच के आईएएस हैं अरुण गोयल

चुनाव आयुक्त अरुण गोयल भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1985 बैच के अधिकारी है. उन्हें 19 नवंबर को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है. वे 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले थे. अपनी नयी भूमिका संभालने के बाद, गोयल मौजूदा सीईसी राजीव कुमार के फरवरी 2025 में सेवानिवृत्त होने के बाद अगले मुख्य निर्वाचन आयुक्त होंगे.

Also Read: Shraddha Murder Case: फडणवीस बोले- श्रद्धा की चिट्ठी पर हुई होती कार्रवाई तो बच जाती जान, करायेंगे जांच

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >