सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए के खिलाफ याचिका पर कहा कि यह दुखद है कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद नीट पेपर लीक से सबक नहीं लिया गया. कोर्ट ने एनटीए से कहा है कि वह 2024 नीट पेपर लीक मामले में अदालत की निगरानी समिति द्वारा दिए गए सुझावों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी हलफनामे के जरिए दे. कोर्ट यह जानना चाहता है कि परीक्षा प्रणाली सुधारने के लिए सुझाए गए निर्देशों का पालन कितना हुआ है.
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाओं की प्रति अन्य पक्षों के अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी दी जाए. पीठ ने कहा कि यह दुखद है कि उन्होंने सबक नहीं सीखा है. यह मामला पहले भी इस कोर्ट में आया था. एक समिति, एक निगरानी समिति गठित की गई थी जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें स्वीकार कर लिया गया था. हम चाहते हैं कि एनटीए समिति द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे.
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सुप्रीम कोर्ट ने FIMA की याचिका पर NTA को नोटिस जारी किया है. यह याचिका वकील तन्वी दुबे के जरिए दायर की गई थी. कोर्ट ने कहा कि इस मामले से जुड़ी सभी समान याचिकाओं को साथ में सुना जाएगा. साथ ही, इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति को निर्देश दिया गया है कि वह NTA में सुधार और कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी दे.
याचिका में मांग की गई है कि जब तक दोबारा परीक्षा की निगरानी के लिए नई समिति नहीं बनती, तब तक सुप्रीम कोर्ट एक हाई लेवल मॉनिटरिंग कमेटी नियुक्त करे. इसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक वैज्ञानिक शामिल हों, ताकि आगे पेपर लीक या डेटा लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके.
एनटीए द्वारा तीन मई को आयोजित नीट-यूजी की परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बीच इसे 12 मई को रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है.
