Strait of Hormuz: भारत ने इस बात से इनकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से अपने जहाजों को सुरक्षित पार कराने के लिए उसने ईरान को नकद या क्रिप्टोकरेंसी में कोई भुगतान किया है. यह बयान उस घटना के बाद आया है, जिसमें 18 अप्रैल को होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे दो भारतीय जहाजों पर ईरानी बलों ने गोलीबारी की थी, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा था.
मंत्रालय ने भुगतान करने के दावे को बताया फर्जी
बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि सनमार हेराल्ड जहाज को सुरक्षित मार्ग देने के लिए ईरान को भुगतान किए जाने के बारे में चलाई जा रही खबरें फर्जी हैं. उन्होंने कहा, जहाज के मालिक से बात करने पर उन्होंने कोई भुगतान न किए जाने की पुष्टि की.
सोशल मीडिया पर क्रिप्टो ठगी का किया जा रहा दावा
सोशल मीडिया पर सामने आई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में सनमार हेराल्ड के कप्तान को यह कहते सुना गया कि उन्हें पहले जलमार्ग पार करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में उन पर गोलीबारी शुरू कर दी गई. कुछ रिपोर्ट में इस घटना को कथित क्रिप्टो ठगी से जोड़ते हुए दावा किया गया था कि फर्जी लोग जहाज मालिकों से सुरक्षित मार्ग दिलाने के नाम पर पैसे मांग रहे हैं. हालांकि, सरकार ने इन दावों को भी खारिज कर दिया.
सनमार शिपिंग ने भी भुगतान करने से किया इनकार
चेन्नई स्थित पोत परिवहन कंपनी सनमार शिपिंग ने भी एक बयान में अपने जहाज की सुरक्षित निकासी के लिए किसी तरह के भुगतान से इनकार किया. उसने कहा कि वह संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर जहाज की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रही है. पोत परिवहन मंत्रालय ने कहा कि वह विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर स्थिति का आकलन करता है और उसी के आधार पर फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने की सलाह दी जाती है.
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