पुणे मर्डर : सीक्रेट कोड में होती थी सिया-चेतन की बातचीत, पुलिस ने खोले राज

पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन पर 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले से केतन को धक्का देकर हत्या करने का आरोप है. इस मामले में अब नया खुलासा सिया-चेतन की बातचीत को लेकर हुआ है. जानें सरकारी वकील ने अदालत को क्या बताया.

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में शुक्रवार (3 जुलाई) को पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और दोनों आरोपियों से आगे भी पूछताछ करना जरूरी है. वकील ने अदालत से दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. उनका कहना था कि सिया और चेतन के मोबाइल फोन से ऐसी चैट मिली हैं, जिनमें इशारों और कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया है. इन बातों का मतलब समझने और मामले की सच्चाई जानने के लिए दोनों से आगे पूछताछ जरूरी है.

वहीं, आरोपियों के वकील ने इस मांग का प्रोटेस्ट किया.उनका कहना था कि पुलिस को जांच के लिए पहले ही काफी समय मिल चुका है. ऐसे में अब दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में रखकर आगे पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की मांग खारिज कर दी. इसके बाद सिया गोयल और चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया.

सरकारी वकील ने कोर्ट को क्या बताया?

सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पुणे मर्डर केस में पुलिस ने उस जगह का पंचनामा किया है, जहां सिया गोयल पर केतन अग्रवाल का पासपोर्ट मुंबई जाते समय फेंकने का आरोप है. पुलिस इस मामले से जुड़े बाकी सबूत भी जुटाने में लगी हुई है. उस जगह की भी जांच की गई है, जहां सिया गोयल और चेतन चौधरी ने केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश और उसकी तैयारी की थी.

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चैट में कोड वर्ड का यूज किया सिया और चेतन ने

सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने सिया गोयल का एक और मोबाइल फोन बरामद किया है. इस फोन को जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजा गया है, ताकि उससे जुड़े अहम सबूत जुटाए जा सकें. उन्होंने बताया कि पहले जब्त किए गए मोबाइल फोन का डेटा निकाल लिया गया है और उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट भी पुलिस को मिल चुकी है. जांच में मिली चैट में कोड वर्ड, निकनेम और इमोजी का इस्तेमाल किया गया है. इनका सही मतलब सिर्फ सिया गोयल और चेतन चौधरी ही बता सकते हैं, इसलिए उनसे आगे पूछताछ जरूरी है. 

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By Amitabh Kumar

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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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