Sharad Pawar Praises PM Modi: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा है कि भले ही उनकी राजनीतिक विचारधारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग हो, लेकिन देश की प्रतिष्ठा के सवाल पर राजनीतिक मतभेदों को आड़े नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं. पुणे स्थित लक्ष्मणराव गुट्टे रुरल डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित पूर्व राज्य और जिला पदाधिकारियों के सम्मान एवं मैत्री समारोह को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए. उन्होंने कहा- हमारी राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन जब बात राष्ट्र के सम्मान की हो, तब राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए.
इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह का किया जिक्र
शरद पवार ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह जैसे नेताओं ने हमेशा देश की प्रतिष्ठा और भविष्य को अपने नेतृत्व के केंद्र में रखा. उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करना हर नेता की प्राथमिकता होनी चाहिए.
संजय राउत ने जताई असहमति
हालांकि, संजय राउत ने शरद पवार के बयान से असहमति जताई. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को सवालों का जवाब देना चाहिए. राउत ने कहा- इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह विदेश यात्राओं के दौरान प्रेस से बातचीत करते थे. वे सवालों से नहीं भागते थे.
युवा राजनीति के दिनों को किया याद
शरद पवार ने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 1958 में 18 साल की उम्र में वह बारामती से पुणे पढ़ाई के लिए आए थे क्योंकि उस समय वहां कॉलेज नहीं था. उन्होंने कहा कि वह युवा आंदोलनों से जुड़े और बाद में पुणे शहर युवा कांग्रेस और महाराष्ट्र युवा कांग्रेस का नेतृत्व किया.
जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात का किस्सा
पवार ने कहा कि उनकी युवावस्था की सबसे यादगार घटनाओं में से एक दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात थी. उन्होंने बताया कि वह किसानों और युवाओं के मुद्दों पर सवाल पूछने गए थे, लेकिन नेहरू के प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण वे अपने सवाल ही भूल गए.
इंदिरा गांधी से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया
पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि सोवियत संघ की यात्रा के दौरान उन्हें लगा था कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा. उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी ने उस समय कहा था- मैं भारत के 40 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती हूं. यदि उनकी प्रतिष्ठा का सम्मान नहीं किया जाएगा, तो मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगी.
पुराने साथियों से साथ आने की अपील
कार्यक्रम के अंत में शरद पवार ने अलग-अलग राजनीतिक दलों में जा चुके अपने पुराने सहयोगियों का स्वागत किया और कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को मजबूत करना हर राजनीतिक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है.
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