शंकर मिश्रा ने मारा यू-टर्न, वकील ने कोर्ट में कहा-महिला ने खुद किया पेशाब, क्योंकि वो कत्थक डांसर हैं …

शंकर मिश्रा के वकील ने कोर्ट में कहा कि शिकायत करने वाली महिला की सीट ब्लाॅक कर दी गयी थी. ऐसे में शंकर मिश्रा के लिए यह संभव नहीं था कि वह महिला के सीट तक पहुंच पाते.

एयर इंडिया की फ्लाइट में एक व्यक्ति द्वारा अपनी सहयात्री पर पेशाब किये जाने के मामले में आज आरोपी व्यक्ति शंकर मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि मैंने अपनी सहयात्री के ऊपर पेशाब नहीं किया था. शंकर मिश्रा ने कहा कि जो आरोप उनपर लगा है उसके लिए जिम्मेदार कोई और शख्स है.

महिला ने खुद किया पेशाब

शंकर मिश्रा के वकील ने कोर्ट में कहा कि शिकायत करने वाली महिला की सीट ब्लाॅक कर दी गयी थी. ऐसे में शंकर मिश्रा के लिए यह संभव नहीं था कि वह महिला के सीट तक पहुंच पाते. वकील का कहना है कि महिला असंयमिता की शिकार थी जिसकी वजह से उन्होंने खुद ही पेशाब कर दिया और अपने सहयात्री पर आरोप लगाया.

विमान के सहयात्रियों ने भी की निंदा

शंकर मिश्रा के वकील का कहना है कि उक्त महिला कथक नृत्यांगना है और कत्थक नृत्य करने वाले कई लोग इस तरह की असंयमिता के शिकार होते हैं. शंकर मिश्रा ने यह यू-टर्न तब मारा है जबकि उस विमान के सहयात्रियों ने घटना की निंदा की और पीड़ित महिला के साथ आरोपी की बातचीत का व्हाटसएप चैट भी मौजूद है.

जज ने मांगा फ्लाइट का डायग्राम

शंकर मिश्रा की दलील पर सेशन कोर्ट के जज ने कहा कि फ्लाइट के एक तरफ से दूसरी तरफ जाना नामुमकिन नहीं है. क्षमा करें, लेकिन मैंने भी यात्रा की है. किसी भी कतार से कोई भी आ सकता है और किसी भी सीट पर जा सकता है. जज ने फ्लाइट की सीट का मानचित्र मांगा है, ताकि स्थिति को अच्छे से समझा जा सके.

सात जनवरी को गिरफ्तार हुए शंकर मिश्रा

ज्ञात हो कि पिछले दिनों शंकर मिश्रा ने न्यूयार्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में अपनी सहयात्री महिला पर पेशाब कर दिया था. जिसकी शिकायत महिला ने चार जनवरी को थी, उसके बाद सात जनवरी को शंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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