राघव चड्डा के आप छोड़ने से बौखलाए संजय सिंह ने कहा -पंजाब में ऑपरेशन लोटस चला रही है बीजेपी

Sanjay Singh : राघव चड्डा के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों द्वारा पार्टी से अलग होने का फैसला लिये जाने से आप में बौखलाहट है. शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर पार्टी छोड़ने वाले सांसदों, प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और बीजेपी की जमकर आलोचना की.

Sanjay Singh :आम आदमी पार्टी के सात सांसदों द्वारा पार्टी छोड़े जाने को पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने बीजेपी का ऑपरेशन लोटस बताते हुए इसे घटिया राजनीति की संज्ञा दी है. संजय सिंह ने कहा कि यह जो कुछ हुआ है, वह पंजाब में भगवंत मान सरकार द्वारा किए जा रहे अच्छे कार्यों को रोकने की साजिश है.

पंजाब का विकास रोकना बीजेपी का षडयंत्र

संजय सिंह ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि भगवंत मान ने पंजाब में कई विकास किए. गरीबों-दलितों के लिए चलाए जा रहे योजनाओं को बीजेपी रोकना चाहती है. पंजाब के सात सांसदों को तोड़कर बीजेपी अपनी पार्टी में शामिल करवा रही है. पंजाब की जनता सब कुछ देख रही है. पंजाब की जनता इन्हें माफ नहीं करेगी, इन लोगों ने पंजाब की जनता के साथ धोखा किया है.

पंजाब की जनता से सातों सांसदों ने धोखा किया

संजय सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने सातों सांसदों को जमीन से उठाकर संसद तक पहुंचाया. अब वही सांसद आप को छोड़ रहे हैं. संजय सिंह ने कहा कि राघव चड्डा को हमने विधायक बनाया, सांसद बनाया और अब वे पार्टी के साथ धोखा कर रहे हैं. जनता सबकुछ देख रही है, वह इन्हें कभी माफ नहीं करेगी. स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल सबने पार्टी के साथ धोखा किया है.

सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं मोदी-शाह

संजय सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा कि मोदी-शाह ने ऑपरेशन लोटस चलाकर आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश की है. इसके लिए इन्होंने अशोक मित्तल के यहां ईडी की छापेमारी की और आज वे बीजेपी में शामिल हो गए हैं. पंजाब में चुनाव होना है, इसलिए बीजेपी इस तरह की साजिश रच रही है. लेकिन वे यह भूल गए हैं कि जनता सबकुछ देख रही है और वह बीजेपी को इसका जवाब देगी.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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