मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक सैंडविच दुकान के उद्घाटन के दौरान रोबोट की मौजूदगी और डांस ने लोगों का ध्यान खींचा. कभी AI और रोबोट सिर्फ टेक कंपनियों की प्रयोगशालाओं तक सीमित नजर आते थे, लेकिन अब वे दुकानों, कारोबार और रोजमर्रा के कामों तक पहुंच रहे हैं. वहीं, इस बदलाव के बीच AI की अगली बड़ी मंजिल AGI यानी Artificial General Intelligence की चर्चा भी तेज हो रही है.
कब तक आ सकती है AGI तकनिक
AGI को लेकर टेक कंपनियों और देशों के बीच भारी होड़ मची है. इसे इंसानों की तरह सोचने और हर बौद्धिक कार्य करने में सक्षम तकनीक माना जा रहा है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह तकनीक 2027 से 2030 के बीच आ सकती है, जिस पर दुनिया भर में युद्ध स्तर पर काम चल रहा है.
AGI आखिर है क्या?
हाल ही में नाइजीरिया की न्यूज वेबसाइट The Punch के एक लेख के मुताबिक, AGI को लेकर अभी कोई निश्चित परिभाषा या यह तय समयसीमा नहीं है कि यह कब आएगी. लेकिन दुनिया भर में ऐसे AI सिस्टम विकसित करने में भारी निवेश हो रहा है, जिनसे उम्मीद है कि वे कम मानवीय निर्देशों के साथ सीखने, तर्क करने और कई तरह के बौद्धिक काम करने में सक्षम होंगे.
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AI और AGI में कितना अंतर?
यानी आज की AI जहां अक्सर किसी खास काम में मदद करती है, वहीं AGI की कल्पना ऐसी मशीन के रूप में की जा रही है, जो अलग-अलग तरह के कामों को समझ सके, नई परिस्थितियों से सीख सके और खुद समस्याओं का समाधान कर सके.
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इसलिए उज्जैन की दुकान में दिखा robot AGI नहीं है, लेकिन यह उस बदलाव की झलक जरूर है, जिसमें AI डिजिटल दुनिया से निकलकर वास्तविक दुनिया के कामों में प्रवेश कर रही है. असली सवाल अब यह है कि अगर AGI जैसी तकनीक विकसित होती है, तो इंसान और मशीन के बीच काम का बंटवारा आखिर कितना बदल जाएगा?
