Religion: भारत की पारंपरिक चिकित्सा, शरीर विज्ञान और योग से जुड़े रहना समय की जरूरत

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार के मुताबिक भारत की पारंपरिक चिकित्सा, शरीर विज्ञान और योग की संपदा से जुड़े रहना अहम है. जीनोम सिर्फ जैविक नहीं है. जीनोम के भीतर सूक्ष्म और स्थूल स्तर होते हैं. पश्चिम और रूस के शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की है.

Religion: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बुधवार को एक परिचर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पश्चिम की तार्किकता ने हमें हमारी पारंपरिक वैज्ञानिक संपदा से विमुख कर दिया है. लोग चेतना के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए अपने शरीर के भीतर ऊर्जा प्रणाली को जागृत कर सकते हैं., लेकिन दुख इस बात की है कि लोगों ने ‘पश्चिमी तार्किकता’  के प्रभाव में शरीर विज्ञान में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह वह समय है जो होमो सेपियंस(बुद्धिमान इंसान) से होमो आध्यात्मिकता की ओर ले जा रहा है. यह वास्तव में अधिक आध्यात्मिकता की ओर जायेगा जिसका अर्थ है कि मानव (मानव) आदि मानव (सुपर ह्यूमन) बन सकता है. पश्चिमी तार्किकता के प्रभाव में भारत शरीर और मन के विज्ञान के बारे में सदियों पुरानी बुद्धिमत्ता से विमुख हो गया है. 

कैसे बदला मन-मिजाज

राजीव कुमार ने कहा कि वह एक कट्टर मार्क्सवादी थे. लेकिन जब उन्होंने ‘द सीक्रेट लाइफ ऑफ प्लांट्स’ नामक पुस्तक पढ़ी, तो उन्हें समझ में आ गया कि भौतिकवाद से परे भी कुछ है. चेतना और आत्मा जैसी कोई चीज है. और यही बात उन्हें मार्क्सवादी दृष्टिकोण से दूर ले गयी.  ‘जीनोम टू ओम’ नामक पुस्तक की परिचर्चा में भाग लेते हुए राजीव कुमार ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा, शरीर विज्ञान और योग की संपदा से जुड़े रहने पर जोर देते हुए कहा, जीनोम सिर्फ जैविक नहीं है. जीनोम के भीतर सूक्ष्म और स्थूल स्तर होते हैं. पश्चिम और रूस के शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की है. पुस्तक को भूषण पटवर्धन एवं इंदु रामचंद्रानी ने लिखा है. कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के डीजी विद्या राजेश कोटेचा ने प्राचीन भारतीय मेडिसिन के उपयोग और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से अपने विचार रखें. वहीं इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिको के चेयरमैन डॉक्टर जयंत देवपुजारी ने इंडियन थॉट और जागरूकता पर अपनी बात रखी. 

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Published by: Anjani kumar singh

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