Ram Navami 2025 : राम नवमी के त्योहार को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है. ऐसा इसलिए ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके. राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती, ड्रोन और बॉडी कैमरों के माध्यम से निगरानी, और क्विक एक्शन टीम की व्यवस्था की है. रामनवमी का त्योहार पूरे देश में रविवार को मनाया जाएगा.
हावड़ा की रामनवमी रैली पर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा, “बंगाल में किसी भी कार्यक्रम के लिए हमें कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है. यहां की सरकार और पुलिस हमें अनुमति नहीं देती. रामनवमी का जुलूस हिंदू समुदाय के रीति-रिवाजों के अनुसार निकाला जाएगा. पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह शांतिपूर्ण आचरण बनाए रखे, कोई बाधा न डाले. लेकिन पुलिस जानबूझकर दुर्व्यवहार करती है और फिर कोर्ट में जाकर कहती है कि अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.”
संवेदनशील क्षेत्रों में खास निगरानी
पश्चिम बंगाल पुलिस ने 10 संवेदनशील क्षेत्र घोषित किए हैं. इन क्षेत्रों में 29 वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया है. इन क्षेत्रों में हावड़ा, बैरकपुर, चंदननगर, मालदा, इस्लामपुर, आसनसोल-दुर्गापुर, सिलीगुड़ी, हावड़ा ग्रामीण, मुर्शिदाबाद और कूचबिहार को रखा गया है. खासकर हावड़ा जिले में, जहां पहले भी हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं, छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है. ये यहां पैनी नजर रख रहे हैं.
कोलकाता में सुरक्षा के खास इंतजाम
राज्य की राजधानी कोलकाता में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. लगभग 5,000 पुलिस कर्मियों को यहां तैनात किया गया है ताकि शांति व्यवस्था से कोई खिलवाड़ न कर सके. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शहर में लगभग चार हजार पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे. लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. शरारती तत्व से कड़ाई से पेश आया जाएगा.
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पुलिस कर्मियों की छुट्टियां रद्द
राम नवमी को देखते हुए सभी पुलिस कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. वे पूरी तरह से इस दौरान उपलब्ध रहेंगे और किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम होंगे. पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं.
पिछले साल रामनवमी में हुई थी हिंसा
पिछले वर्षों में राम नवमी के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाएं देखने को मिलीं थीं. 2023 में हावड़ा, हुगली और डालखोला में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं. इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने इन मामलों की जांच के लिए एनआईए को आदेश दिया था.
