राम मंदिर चंदा विवाद : अरविंद केजरीवाल का आरोप-छुटभैयों को गिरफ्तार कर असली दोषियों को बचा रही है सरकार

Arvind Kejriwal: राम मंदिर चंदा विवाद मामले में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि इस मामले में 200 करोड़ की चोरी हुई है, लेकिन बरामद सिर्फ 80 लाख रुपए हुए हैं, तो मेरा सिर्फ यही सवाल है कि आखिर बाकी के पैसे कहां गए.

Arvind Kejriwal: अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि राम मंदिर दान चोरी मामले में अभी तक सिर्फ छुटभैये आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. जो असली आरोपी हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. यह बस मामले को दबाने की कोशिश है. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई भी है, उनसे कोई पुलिस पूछताछ नहीं हुई है. आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. कुछ ही दिनों बाद इनकी बेल करा दी जाएगी और पूरे मामले पर लीपा-पोती कर दी जाएगी.

चोरी का करोड़ों रुपया आखिर कहां गया?

अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के सामने कहा कि चंदा चोरी हुआ है 200 करोड़, लेकिन बरामद हुए हैं 80 लाख. मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिर बाकी का पैसा कहां गया? सरकार सिर्फ इस चोरी को दबाने की कोशिश कर रही है. केजरीवाल ने यह आरोप भी लगाया कि जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, वे बहुत मामूली लोग है. गिरफ्तार लोगों से कोई पूछताछ नहीं हुई है, आखिर उन्होंने पैसा कहां पहुंचाया? कुछ भी नहीं पूछा गया है.

चंदा विवाद के सामने आने के बाद अयोध्या पहुंचे थे केजरीवाल

श्रीराम मंदिर चंदा विवाद के सामने आने के बाद से अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है. इसी क्रम में वे अयोध्या भी गए थे और हनुमानगढ़ी जाकर पूजा अर्चना भी की थी. आप के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी सरकार पर हमला किया है और कहा है कि सरकार असली दोषियों को पकड़ने का कोई इरादा नहीं रखती है.पुलिस ने आरोपियों की ज्यूडिशियल कस्टडी भी नहीं मांगी है. क्या इससे यह पता नहीं चलता कि वे ठीक से जांच और पूछताछ करने को तैयार नहीं हैं? असल में, आरोपियों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उन्हें बस सभी आरोप मान लेने हैं, उन्हें सजा मिलेगी और उन्हें सुरक्षा दी जाएगी. यह असली आरोपियों को बचाने और मामले को दबाने की कोशिश है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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