Rajbhasha vibhag@50: किसी भी भारतीय भाषा का विरोधी नहीं हो सकती हिंदी

राजभाषा विभाग ने तय किया है कि आने वाले दिनों में भारतीय भाषा अनुभाग के माध्यम से भारतीय भाषाओं को किशोरों और युवाओं की भाषा बनाया जायेगा. विगत कुछ दशकों में भाषा को भारत को तोड़ने का ज़रिया बनाया गया था, लेकिन इस प्रयास में सफलता नहीं मिली. यह सुनिश्ति करना होगा कि हमारी भाषाएं भारत को तोड़ने का नहीं बल्कि जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनें.

Rajbhasha vibhag@50: राजभाषा विभाग की स्थापना का उद्देश्य था कि देश का शासन नागरिकों की भाषा में चले और प्रशासन में भारतीय भाषाओं का उपयोग कर देश के आत्मसम्मान को जागृत किया जाए. क्योंकि कोई भी देश अपनी भाषा के बिना अपनी संस्कृति, साहित्य, इतिहास और सामाजिक संस्कार को चिरंजीव नहीं रख सकता. अपनी संस्कृति के आधार पर आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए देश का शासन उसकी अपनी भाषाओं में होना चाहिए. इस महान उद्देश्य के साथ राजभाषा विभाग की शुरुआत हुई थी और 50 वर्ष की यह यात्रा आज एक ऐसे मुकाम पर खड़ी है जब हमें इसे आगे ले जाने का प्रयास और पूरा रास्ता तय करना है.

संघर्ष, साधना और संकल्प के आधार पर इस 50 साल की यात्रा को हम सबने मिलकर पूरा किया है. केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नयी दिल्ली में राजभाषा विभाग के ‘स्वर्ण जयंती समारोह’ में मुख्य अतिथि के तौर पर उपरोक्त बातें कही. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रण में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति बहुत महत्वपूर्ण प्रण है. जब तक व्यक्ति अपनी भाषा पर गौरव नहीं करता, अभिव्यक्ति, सोच, विश्लेषण और निर्णय लेने की क्षमता को अपनी भाषा में नहीं गढ़ता, तब तक हम गुलामी की मानसिकता से मुक्त नहीं हो सकते.

भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, राष्ट्र की आत्मा होती है

अमित शाह ने कहा कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र की आत्मा होती है. हमारी जड़ें, परंपराएं, इतिहास, पहचान और जीवन संस्कृति भाषा से कटकर आगे नहीं बढ़ सकते और भाषाओं को जीवंत रखना और समृद्ध करना बहुत ज़रूरी है. हमें आने वाले दिनों में सभी भारतीय भाषाओं और विशेषकर राजभाषा के लिए ये सभी प्रयास करने चाहिए. कोई भी राज्य अपनी मातृभाषा की उपेक्षा कर कभी महान नहीं बन सकता और मोदी सरकार ने अपनी भाषाओं को सम्मानित और प्रतिष्ठित करने के लिए अनेक प्रयास किए हैं.

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में ही मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता प्रदान की गई है. आज भारत में संस्कृत, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली के रूप में 11 शास्त्रीय भाषाएं उपलब्ध हैं. पूरे विश्व में ऐसा कोई देश नहीं है जिसके पास 11 शास्त्रीय भाषाएं हैं. वर्ष 2020 में संस्कृत के लिए तीन केन्द्रीय विद्यालय स्थापित किए गए और अनुसंधान और अनुवाद के लिए केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान की स्थापना की गई.

हमारी भाषाएं भारत को तोड़ने का नहीं बल्कि जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनें

अमित शाह ने कहा कि राजभाषा विभाग ने तय किया है आने वाले दिनों में हम भारतीय भाषा अनुभाग के माध्यम से भारतीय भाषाओं को किशोरों और युवाओं की भाषा बनाएंगे. विगत कुछ दशकों में भाषा को भारत को तोड़ने का ज़रिया बनाया गया था, लेकिन इस प्रयास में सफलता नहीं मिली. हमें सुनिश्ति करना होगा कि हमारी भाषाएं भारत को तोड़ने का नहीं बल्कि जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनें. गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आज रखी जा रही नींव 2047 में एक विकसित और महान भारत की रचना करेगी. इसके अंतर्गत भारतीय भाषाओं को उन्नत और समृद्ध बनाने के साथ ही इनकी उपयोगिता भी बढ़ाई जाएगी. इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंडी संजय कुमार, संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष भर्तृहरि महताब, राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या सहित अनेक गणमान्य लोग और वरिष्ट अधिकारी उपस्थित रहे.

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