वसुंधरा राजे के करीबी को बीजेपी ने किया नजरअंदाज! यूनुस खान ने लिया ये बड़ा फैसला

यूनुस खान ने कहा कि कई पार्टियों ने उनसे संपर्क किया है लेकिन उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, खान राजे सरकार में परिवहन और पीडब्ल्यूडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं.

राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है. इस बीच बीजेपी से, खासकर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है. दरअसल, राजे के करीबी और विश्वासपात्रों में से एक माने जाने वाले यूनुस खान को बीजेपी ने टिकट देने से इनकार कर दिया था. बीजेपी के द्वारा यह निर्णय लेने के दो दिन के बाद, राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा है कि वह पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने डीडवाना निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय के रूप में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. यहां से वह दो बार विधायक चुने गए हैं. खान ने शनिवार को डीडवाना में एक विशाल रैली आयोजित की. इसके बाद उक्त निर्णय लिया, जहां उनके समर्थकों ने उनसे चुनाव लड़ने का आग्रह किया. आपको बता दें कि इस सप्ताह की शुरुआत में, बीजेपी ने डीडवाना से उम्मीदवार के रूप में जितेंद्र सिंह जोधा को चुनावी मैदान में उतारा जिसके बाद से कयासों का बाजार गर्म था. जोधा 2018 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के उम्मीदवार थे लेकिन कांग्रेस के चेतन डूडी ने उन्हें हरा दिया था.

जनता से मैंने किया सवाल तो…

2018 के चुनाव की बात करें तो, यूनुस खान को टोंक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस नेता सचिन पायलट के खिलाफ इस चुनाव में बीजेपी ने उतारा था. इस चुनाव में वे भारी अंतर से हार गए थे. खान ने रैली के बाद मीडिया से बात की और कहा कि मैं अपना इस्तीफा बीजेपी को भेज दूंगा. ऐसा इसलिए ताकि मुझे पार्टी से निष्कासित न किया जा सके. उन्होंने कहा कि चुनावी मैदान में मैं अकेला नहीं बल्कि हजारों कार्यकर्ता मेरे साथ जा रहे हैं. ये बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. मेरा पार्टी से अनुरोध होगा कि वह मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लें. जनभावना का सम्मान करना मेरा कर्तव्य है. मैं इस रैली में जनता से सवाल करने आया था जिसका जवाब मुझे मिला. जनता ने कहा कि मुझे चुनाव लड़ना चाहिए. क्योंकि बीजेपी ने पहले ही क्षेत्र से उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया है, इसलिए मेरे पास पार्टी छोड़ने और निर्दलीय के रूप में लड़ने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं हैं. मैं 6 नवंबर को अपना नामांकन दाखिल करूंगा.

कई पार्टियों ने किया संपर्क

यूनुस खान ने कहा कि कई पार्टियों ने उनसे संपर्क किया है लेकिन उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने लगभग 25 टिकट ऐसे लोगों को दे दिया हैं जिन्होंने पार्टी को ही हराने का काम किया है. जिस पार्टी की स्थापना दीन दयाल उपाध्याय जी, अटल बिहारी वाजपेई जी, आडवाणी जी, भैरों सिंह शेखावत जी ने की थी, वहां का माहौल अब खराब हो चुका है. इसे देखकर मुझे दुख होता है. मुझे अब भी बीजेपी की विचारधारा पसंद है. मुझे लगता है कि पार्टी ने कई फैसले जल्दबाजी में लिए हैं. आगे खान ने कहा कि पार्टी ने राजे का विरोध करने वाले नेताओं को बीजेपी में शामिल होने का अवसर प्रदान किया.

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राजे सरकार में नंबर दो में होती थी गिनती

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत की देख रेख में बीजेपी से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले यूनुस खान 2003 और 2013 में डीडवाना से विधायक रहे हैं. मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, खान ने राजे सरकार में परिवहन और पीडब्ल्यूडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले थे. उन्हें अक्सर सरकार में नंबर दो के रूप में माना जाता था. हाल के वर्षों में, डीडवाना में मुसलमानों, जाटों और राजपूतों के बीच खासी पहचान रखने वाले, खान को बीजेपी ने नजरअंदाज कर दिया. बीजेपी चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में नहीं उतार रही है. खान 2018 में बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार थे. पिछले चुनाव में कई दिनों तक उनका टिकट रोकने के बाद, पार्टी ने आखिरकार उन्हें टोंक से मैदान में उतारा था.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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