गुजरात चुनाव में एक्टिव नहीं होने पर बोले राहुल गांधी-भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हूं, जरूरत हुई तो ...

राहुल गांधी ने कहा कि आठ साल से देश में डर का माहौल है, नफरत और हिंसा फैलाई जा रही है. सरकार का ध्यान युवाओं और किसानों की समस्या पर नहीं है. वे सिर्फ अपने हित के लिए आम लोगों को आपस में लड़ा रहे हैं.

राहुल गांधी ने आज कहा कि वे भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हैं, इसलिए गुजरात चुनाव में प्रचार के लिए नहीं जा पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि यात्रा सितंबर से शुरू हुई है और अभी एक-दो महीने चलेगी इसलिए वे चुनाव प्रचार में बहुत एक्टिव नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष अगर कहेंगे कि उन्हें प्रचार में शामिल होना है तो वे जरूर जायेंगे.

देश में डर का माहौल

राहुल गांधी ने कहा कि आठ साल से देश में डर का माहौल है, नफरत और हिंसा फैलाई जा रही है. सरकार का ध्यान युवाओं और किसानों की समस्या पर नहीं है. वे सिर्फ अपने हित के लिए आम लोगों को आपस में लड़ा रहे हैं. इस माहौल के खिलाफ हमने भारत जोड़ो यात्रा शुरू की है, यह यात्रा कन्याकुमारी से श्रीनगर तक जायेगी. अगर इस यात्रा की जरूरत लोगों को नहीं थी तो लाखों लोगों का समर्थन हमें नहीं मिलता.


युवाओं को रोजगार का भरोसा नहीं

राहुल गांधी ने आज मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रही है. उन्हें यह भरोसा नहीं मिल पा रहा है कि उन्हें रोजगार मिलेगा. दूसरी ओर किसानों को अपने समर्थन में कोई नहीं दिख रहा है और तीसरी समस्या यह है कि आम आदमी शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भुगतान तो कर रहा है, लेकिन उन्हें सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर पैसा जा कहां रहा है? सरकार अस्पतालों और स्कूलों को बंद कर रही है.

सावरकर अंग्रेजों के मददगार थे 

इस मौके पर राहुल गांधी ने वीर सावरकर का एक पत्र पढ़ा और कहा कि वे अंग्रेजों की मदद करते हैं, जो इस चिट्ठी से प्रमाणित होता है. मैं यह पत्र फडनवीस जी को भी दे सकता हूं. वीर सावरकर के पत्र से यह साबित होता है कि वे अंग्रेजों के गुलाम बनकर रहना चाहते थे. राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य सिर्फ नफरत फैलाना और लोगों को आपस में लड़ाना है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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