पंजाब की राजनीति में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. दोनों पार्टियां लंबे समय तक सहयोगी रहीं, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ा. नतीजों से साफ हुआ कि दोनों के पास कुछ मजबूत इलाके और अपना वोट बैंक है, लेकिन अकेले दम पर किसी भी पार्टी ने अब तक ऐसी जीत हासिल नहीं की, जिससे सरकार बनाने का स्पष्ट दावा किया जा सके. ऐसे में दोनों के लिए दोबारा साथ आना सियासी तौर पर फायदेमंद हो सकता है.
दोनों चुनावों के आंकड़े बीजेपी के सामने खड़ी चुनौती को साफ दिखाते हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 6.6 फीसदी वोट मिले थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 फीसदी हो गए. यानी बीजेपी का वोट शेयर तेजी से बढ़ा है. 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकाली दल से अलग होकर राज्य की 117 में से 73 सीटों पर चुनाव लड़ा था. पार्टी को सिर्फ दो सीटों (पठानकोट और मुकेरियां) पर जीत मिली.
ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी बीजेपी को
इस नतीजे से साफ हुआ कि पंजाब में बीजेपी का संगठन और सामाजिक आधार अभी सीमित है. पार्टी को शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में बेहतर समर्थन मिला, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में वह कमजोर रही. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वोट शेयर की तस्वीर काफी अलग नजर आई.
लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा. पार्टी का वोट शेयर बढ़कर 18.56 फीसदी हो गया, यानी उसे करीब पांच में से एक वोट मिला. इसके बावजूद बीजेपी एक भी लोकसभा सीट जीतने में कामयाब नहीं रही. बीजेपी के 2024 के प्रदर्शन से सबसे बड़ी सीख यह है कि ज्यादा वोट मिलना जरूरी नहीं कि ज्यादा सीटों में भी बदले. लोकसभा और विधानसभा चुनाव का समीकरण अलग होता है. विधानसभा चुनाव में पंजाब के मतदाता स्थानीय नेतृत्व, सरकार के कामकाज, खेती-किसानी, रोजगार, कानून-व्यवस्था और जनकल्याण योजनाओं जैसे मुद्दों को ज्यादा महत्व दे सकते हैं. इसलिए बीजेपी यह मानकर नहीं चल सकती कि लोकसभा में मिले 18.56 फीसदी वोट विधानसभा चुनाव में भी उतने ही मिलेंगे.
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अकाली दल के प्रदर्शन पर एक नजर
अकाली दल (SAD)का सियासी सफर बीजेपी से उलट रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में SAD को 18.38 फीसदी वोट मिले और उसने तीन सीटें जीतीं. यह बीजेपी के 6.6 फीसदी वोट से काफी ज्यादा था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सत्ता हासिल कर ली. 2024 के लोकसभा चुनाव में SAD का प्रदर्शन और कमजोर हुआ. पार्टी ने सभी 13 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन वोट शेयर घटकर 13.42 फीसदी रह गया और सिर्फ बठिंडा सीट जीत सकी. 2019 में यही वोट शेयर 27.45 फीसदी था.
