SRCC में बोले PM मोदी: 'होम्योपैथी की गोली दी और सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए', कांग्रेस पर भी साधा निशाना

प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के SRCC कॉलेज में 100वीं वर्षगांठ पर 'दिमागी नक्सल' बयान पर खुलकर बात रखी. उन्होंने होम्योपैथी की दवा का उदाहरण देते हुए तंज कसा.

PM Modi on Dimagi Naxal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के नामचीन श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के 100वीं वर्षगांठ में शामिल हुए. छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से दिए गए अपने 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर मचे सियासी बवाल पर खुलकर अपनी बात रखी.

उन्होंने होम्योपैथी दवा के असर करने के तरीके का दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहा कि जब यह दवा दी जाती है, तो शुरुआत में बीमारी तेजी से उभरकर बाहर आती है और फिर उसका इलाज शुरू होता है. पीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जैसे ही उन्होंने लाल किले से 'दिमागी नक्सल' की होम्योपैथिक खुराक दी, सारे तथाकथित बौद्धिक नक्सली एक-एक कर खुद बाहर आने लगे और जनता अब उनका असली चेहरा साफ देख रही है.

'देश सुरक्षित हो रहा और कुछ लोगों की बौखलाहट बढ़ रही'

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 की तुलना में आज भारत आर्थिक और सामाजिक दोनों ही मोर्चों पर कहीं ज्यादा मजबूत और सुरक्षित स्थिति में है. लेकिन देश की इस तरक्की और सुरक्षा को देखकर कुछ खास विचारधारा के लोगों में छटपटाहट और घबराहट बढ़ती जा रही है.

BJP का X पोस्ट-

"2013 की तुलना में आज देश आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है. लेकिन यह देखकर कुछ लोगों की घबराहट बढ़ रही है. ऐसे लोगों के लिए मैंने लाल किले से होम्योपैथी की एक खुराक दी थी... 'दिमागी नक्सल'! होम्योपैथी की गोली शुरुआत में कुछ समय के लिए बीमारी को उभारती है और फिर उसका इलाज करती है. इसलिए जैसे ही मैंने 'दिमागी नक्सल' की होम्योपैथी गोली दी, सारे दिमागी नक्सल खुलकर सामने आ गए."

2008 और 2013 का जिक्र कर पिछली सरकारों को घेरा

छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पिछली यूपीए सरकार के दौर की नाकामियों को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आज कई लोगों को लगता है कि 140 करोड़ के देश को संभालना आसान काम है, लेकिन 2014 से पहले हालात बिल्कुल अलग थे. उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में जब केदारनाथ की भीषण आपदा आई थी, तो तत्कालीन केंद्र सरकार पूरी तरह असहाय हो गई थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि स्थिति से कैसे निपटा जाए.

वैश्विक बैंकिंग संकट का उदाहरण

इसके साथ ही उन्होंने 2008 के वैश्विक बैंकिंग संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वक्त की सरकार संकट से निपटने का साहस नहीं दिखा सकी और सालों तक समस्याएं छिपाती रही, जिससे देश का बैंकिंग ढांचा तबाही के कगार पर पहुंच गया था. पीएम ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले की याद दिलाते हुए कहा कि उस वक्त देश पर इतना बड़ा हमला हुआ, लेकिन तब की सरकार विदेशी दबाव में आ गई और पाकिस्तान को करारा जवाब देने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाई.

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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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