वाराणसी : महिला सम्मेलन में बोले पीएम मोदी महिलाओं को शासन में भागीदार बनाने के लिए 33% आरक्षण जरूरी

PM Modi In Varanasi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में 6,322 करोड़ की 163 योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, उसके बाद उन्होंने महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त करना है, ताकि वे अपने घर की मालकिन बनें और उनकी आवाज बुलंद हो.

PM Modi In Varanasi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनोखे अंदाज में अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी में महिला शक्ति का अभिनंदन किया. उन्होंने कहा वाराणसी माता श्रृंगार गौरी, माता विशालाक्षी और मां गंगे की धरती है. इस धरती पर जब वाराणसी की मां-बहनें इकट्ठा होती हैं,तो वह समागम अद्‌भुत होता है. पीएम मोदी ने कहा कि देश के नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है.

महिला आरक्षण के लिए महिलाओं का समर्थन जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि मुझे आपका साथ चाहिए. मैं यह चाहता हूं कि घर की महिलाएं सशक्त हों. इसके लिए मैं उन्हें लोकसभा और विधानसभा में 33प्रतिशत आरक्षण दिलाना चाहता हूं और इसके लिए मुझे आपका समर्थन चाहिए. मैंने कोशिश भी की, लेकिन समाजवादी और कांग्रेस पार्टी ने मेरा प्रयास को साकार रूप नहीं लेने दिया. मगर मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि मैं यह प्रयास फिर करूंगा, क्योंकि महिलाओं को मजबूत करना मेरी सरकार का लक्ष्य है.

महिलाओं का कल्याण और उनका सशक्तिकरण मोदी सरकार का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेरी सरकार बेटियों के लिए पढ़ाई, कमाई और दवाई की व्यवस्था कर रही है. मैं यह चाहता हूं कि बेटियां सुरक्षित हों और सशक्त हों. ना सिर्फ परिवार में बल्कि देश के शासन में भी उनकी आवाज सुनी जाए. महिलाएं सशक्त हो रही हैं और उनकी आवाज घर में बुलंद हो रही है. वे घर की मालकिन बन रही हैं.10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं. 3 करोड़ लखपति दीदी बन चुकी हैं.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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