जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पीएम मोदी फ्रांस रवाना, एक सप्ताह की यात्रा में स्लोवाकिया भी जाएंगे

PM Modi G7 Summit : यह लगातार आठवां जी-7 शिखर सम्मेलन है, जिसमें भारत को आमंत्रित किया गया है. जी-7 में भारत केवल अपनी बात ही नहीं रखेगा बल्कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील और अविकसित देशों की आवाज बनेगा.

PM Modi G7 Summit : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार 13 जून को जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस की यात्रा पर रवाना हो गए. इस एक सप्ताह की यात्रा में पीएम मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा करेंगे और इस दौरान वे जी-7 समिट में भी भाग लेंगे.

भारत के लिए महत्वपूर्ण है फ्रांस

प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान विभिन्न द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विश्व के कई नेताओं के साथ बातचीत करेंगे. यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि भारत की रणनीतिक दृष्टि में फ्रांस का एक खास स्थान है. इसी वर्ष राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे और हमने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था. उन्होंने कहा कि जब मैं नीस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करूंगा, तब हम फरवरी के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और सहयोग के अगले चरणों की रूपरेखा तय करेंगे. मैं आपसी हितों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा के लिए उत्सकु हूं.

VivaTech 2026 में शामिल होंगे पीएम मोदी

पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया कि मैं 18 तारीख को पेरिस में रहूंगा, जहां मैं प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ VivaTech 2026 में शामिल होऊंगा. मुझे टेक और इनोवेशन के लिए यूरोप के एक जरूरी इवेंट में शामिल होकर खुशी हो रही है. उसी दिन, मैं फ्रांस में इंडियन कम्युनिटी से बातचीत करने का भी इंतजार कर रहा हूं.

स्लोवाकिया की यात्रा मील का पत्थर

पीएम मोदी ने कहा कि स्लोवाकिया की उनकी यात्रा एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को और आगे बढ़ाएगी. यह 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की पहली यात्रा होगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि वह स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ ब्रातिस्लावा में चर्चा को लेकर उत्साहित हैं.मोदी ने कहा कि फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी, भारत के प्रति उसके साझेदार देशों के विश्वास और उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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