Parliament Session : सरकार ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. इसके लिए ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ गुरुवार को (16 अप्रैल) लोकसभा में पेश किए गए. ये सभी बिल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के मकसद से लाए गए हैं. इन विधेयकों पर गुरुवार देर रात एक बजकर 20 मिनट तक चर्चा हुई. शुक्रवार सुबह इन पर चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी.
न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के कई नेताओं (काकोली घोष, मणिकम टैगोर, केसी वेणुगोपाल और पी चिदंबरम) को आज संसद में INDIA ब्लॉक के सभी सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है. ऐसा इसलिए ताकि अहम मुद्दों पर वोटिंग के दौरान पूरी ताकत दिखाई जा सके.
विपक्षी दलों ने सरकार पर क्या लगाए आरोप?
विपक्षी दलों ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और अन्य पिछड़े वर्गों से उनकी हिस्सेदारी छीनने की तैयारी में है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से मुक्त करके 2029 से ही लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 के आधार पर लागू किया जा सकता है.
श्रेय विपक्षी दलों को देने में भी पीएम मोदी को कोई दिक्कत नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी पार्टियों से कहा है कि महिला आरक्षण वाले इस संविधान संशोधन बिल को मिलकर पास करें. उन्होंने साफ कहा कि जो इसका विरोध करेगा, उसे लंबे समय तक इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. मोदी ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीति से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. उन्होंने यह भी जताया कि अगर यह बिल पास होता है, तो इसका श्रेय विपक्षी दलों को देने में भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.
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प्रधानमंत्री मोदी ने परिसीमन से जुड़ी कुछ सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि जैसे पहले परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा और सीटों की संख्या में वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी.
महिला आरक्षण अधिनियम 2023 लागू
इस बीच, महिला आरक्षण अधिनियम 2023 16 अप्रैल से लागू भी हो गया. केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई. संसद में इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को लागू किया गया.
