Parliament Special Session : पुराने भवन में हुआ सांसदों का फोटोशूट, पीएम मोदी और सोनिया गांधी भी पहुंचे

Parliament Special Session: संसद के पुराने भवन में फोटो शूट के दौरान सभी सांसद भावुक थे और वे सभी इस फोटोशूट का हिस्सा बने.

संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन आज संसद के पुराने भवन में सांसदों का फोटोशूट हुआ. यह फोटोशूट बहुत ही खास है क्योंकि आज सांसद पुराने संसद भवन को विदाई देकर नये संसद भवन की ओर प्रस्थान करेंगे. संसद के पुराने भवन में फोटो शूट के दौरान सभी सांसद भावुक थे और वे सभी इस फोटोशूट का हिस्सा बने.

फोटोशूट के दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी पहुंचे और उत्साह के साथ सभी सांसदों के साथ तस्वीर खिंचाई. यह समय बहुत भावुक था और सभी सांसदों पुरानी यादों में खोए थे.

फोटोशूट में शामिल होने के बाद पीएम मोदी संसद के सेंट्रल हाॅल पहुंचे. जहां सांसदों का संबोधन हुआ. प्रधानमंत्री ने सोमवार को संसद के विशेष संत्र के पहले दिन बड़ा ही भावुक भाषण दिया था.

सांसदों के फोटोशूट के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी पहुंचीं. वे पूरे उत्साह में नजर आ रही थीं.

संसद के विशेष सत्र के दौरान आज दूसरे दिन भी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पूरे उत्साह के साथ पहुंचीं. उनके साथ साथ कांग्रेस नेता वेणुगोपाल भी पहुंचें.

संसद के सेंट्रल हाॅल में आज लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन के नेता मौजूद थे और सबने अपनी स्मृतियां साझा कीं. इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला.

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Published by: Rajneesh anand

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राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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