Parliament: हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

हंगामे के बीच गुरुवार को सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी. लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में नियोजित व्यवधान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नारेबाजी करने, तख्तियां दिखाने और निरंतर गतिरोध से संसदीय मर्यादा को ठेस पहुंचती है. सदन में गंभीर और सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.

Parliament: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष की ओर से मानसून सत्र में लगातार हंगामा किया गया. मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर दोनों सदन में लंबी चर्चा हुई, लेकिन इसके अलावा पूरे सत्र में विपक्ष एसआईआर पर हंगामा करता रहा. सरकार की ओर से साफ किया गया है कि मामला अदालत में विचाराधीन है और ऐसे मामले पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती है. आखिरकार हंगामे के बीच गुरुवार को सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी. 

कुल 14 विधेयक किये गये पारित

इस दौरान लोकसभा में कुल 14 विधेयक पेश किया गया, जिसमें से 12 विधेयक हंगामे के बीच पारित किए गए. इनमें अनुसूचित जनजातियों के विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्समायोजन से संबंधित गोवा विधेयक 2025, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2025, मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025, मणिपुर विनियोग (संख्या 2) विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक 2025 के अलावा आयकर विधेयक 2025, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025, खनिज और खनिज विकास (विनियमन और संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक 2025 और ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 भी हंगामे के बीच लोकसभा में पारित हुआ.

गुरुवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों की ओर से जमकर हंगामा किया गया. विपक्ष बिहार में एसआईआर पर चर्चा कराए जाने की मांग पर अड़ा रहा है. विपक्षी सांसदों के हंगामे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मानसून सत्र का आखिरी दिन है और प्रश्नकाल में सांसद बाधा पैदा कर रहे हैं. उन्होंने सांसदों ने प्रश्नकाल चलने देने की अपील की. लेकिन हंगामा थमा नहीं और सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गयी. इस सत्र की शुरुआत 21 जुलाई को हुई थी. 

लोकसभा में केवल 37 घंटे ही हुई चर्चा  


लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोगों को प्रतिनिधियों से बहुत उम्मीदें होती है, इसलिए उन्हें सदन में अपने समय का उपयोग जनहित के मुद्दों को उठाने और सदन में गंभीर चर्चा के लिए होनी चाहिए.इस सत्र के लिए 419 तारांकित प्रश्न शामिल किए गए थे किंतु लगातार व्यवधान के कारण सिर्फ 55 प्रश्नों का ही मौखिक उत्तर दिया गया. गतिरोध के कारण लोकसभा में केवल 37 घंटे ही चर्चा हो सकी. जबकि चर्चा के लिए 120 घंटे आवंटित किये गये थे. बिरला ने विपक्ष के प्रदर्शन के तरीके पर निराशा प्रकट करते हुए कहा कि जनता बहुत उम्मीदों के साथ सांसदों को चुनकर भेजती है ताकि उनकी समस्याओं और व्यापक जनहित के मुद्दों पर सदन में चर्चा हो सके. लेकिन सदन के अंदर और संसद के बाहर जिस तरह विपक्षी सांसदों के सदस्यों का व्यवहार रहा वह सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं रहा. उन्होंने कहा कि सदन में सत्र के दौरान जिस तरह की भाषा और व्यवहार देखा गया वह संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं था.

विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच नहीं दूर हो पाया गतिरोध

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने के अगले दिन तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया. विपक्ष की ओर से इस मामले पर भी सवाल उठाया गया. इस दौरान हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है और आरोपों की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया. लेकिन विपक्ष की ओर से एसआईआर पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा होता रहा. हंगामे के बीच ही कई विधेयक को पारित किया गया. 

बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए जाने और लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाए जाने के प्रावधान वाले संविधान (130 वां संशोधन) विधेयक, 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 को पेश किया. इस दौरान विपक्षी सांसदों की ओर से जोरदार हंगामा किया गया. सरकार ने विधेयक पर व्यापक चर्चा के लिए इसे संयुक्त समिति को भेजने का फैसला लिया. 

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