जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जारी किया डोमिसाइल सर्टिफिकेट, तो पाक पीएम इमरान खान के पेट में हुआ दर्द, ट्‌वीट कर कही ये बात…

Pakistan PM Imran khan reacted on Jammu and Kashmir Administration issued domicile certificate : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आज ट्‌वीट करके एक बार फिर कश्मीर राग अलापा है. इमरान खान ने अपने ट्‌वीट में लिखा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का प्रयास कर रहा है. इमरान खान को इस बात से परेशानी हो रही है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्यों के लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया है.

नयी दिल्ली : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आज ट्‌वीट करके एक बार फिर कश्मीर राग अलापा है. इमरान खान ने अपने ट्‌वीट में लिखा है कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का प्रयास कर रहा है. इमरान खान को इस बात से परेशानी हो रही है कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्यों के लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया है.

इमरान खान ने कहा है कि वे इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ के सचिव के सामने भी उठायेंगे. कश्मीर राग अलापते हुए इमरान खान ने एक बार फिर कहा है कि वे इस मसले को लेकर विश्व के बड़े नेताओं से संपर्क करेंगे. इमरान खान ने भारत के अंदरुनी मसले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि भारत के इस रवैये से कश्मीरी जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है.

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 15 वर्ष से ज्यादा समय से जम्मू -कश्मीर में रह रहे लोगों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट देना शुरू किया है, जिससे यहां रहे लोगों की वर्षों की मांग पूरी हो गयी है. कुछ ही दिन पहले बिहार के रहने वाले जम्मू-कश्मीर कैडर के आईएएस अधिकारी नवीन कुमार चौधरी को जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया गया था, वे पहले ऐसे व्यक्ति बने हैं जिन्हें जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया है.

जिन्हें डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया गया है उनमें पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थी,दलित वर्ग के लोग, गोरखा समुदाय के लोग और आरएस पुरा, बिश्नाह, बाहू, जम्मू दक्षिण आदि क्षेत्र के लोग शामिल हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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