बहन के कंकाल को लेकर बैंक जाता आदिवासी शख्स, फोटो ANI

बहन का कंकाल लेकर पैसा निकालने पहुंचा शख्स, बैंक में मची अफरा-तफरी

Odisha Tribal Man: ओडिशा के क्योंझर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. पैसे निकालने गए एक शख्स से जब बैंक ने खाताधारक (अकाउंट होल्डर) को लाने के लिए कहा, तो वह अपनी मृत बहन के कंकाल को ही लेकर बैंक पहुंच गया. इस घटना के बाद बैंक में अफरा-तफरी मच गई.

Odisha Tribal Man: मामला 27 अप्रैल का है. दियानाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा नामक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन के खाते से 20 हजार रुपये निकालने के लिए बैंक पहुंचा था. लेकिन वह पैसे नहीं निकाल पाया, क्योंकि बैंक कर्मचारियों ने उससे बहन का मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) का प्रमाण पत्र मांगा, जो उसके पास उपलब्ध नहीं थे. बैंक के चक्कर काट-काटकर जीतू परेशान हो गया, जिसके बाद उसने यह कठोर कदम उठाया. वह सीधे श्मशान घाट पहुंचा, कब्र खोदकर अपनी बहन का कंकाल निकाला, उसे कपड़े में लपेटा और बैंक पहुंच गया.

3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचा शख्स, कंकाल देखकर मची अफरा-तफरी

जीतू मुंडा अपनी बहन के कंकाल को कंधे पर रखकर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचा. बैंक पहुंचने के बाद जैसे ही उसने कपड़े को हटाया, वहां अफरा-तफरी मच गई. बैंक कर्मचारियों ने उसे समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना. अंत में पुलिस को बुलाना पड़ा.

क्योंझर के सब-कलेक्टर ने क्या कहा?

घटना पर क्योंझर के सब-कलेक्टर उमा शंकर दलाई ने कहा, आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा को बैंक की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी नहीं थी. हताशा में आकर उसने ऐसा किया. पहली नजर में लगता है कि चूंकि यह व्यक्ति अपनी बहन का प्रथम श्रेणी का कानूनी वारिस (Class-I legal heir) नहीं है, इसलिए वह संबंधित बैंक द्वारा मांगे गए दस्तावेज पेश नहीं कर सका. उन्होंने आगे कहा, जीतू आज जरूरी दस्तावेजों के लिए आवेदन करेगा. हम बैंक के साथ परामर्श करके 20,000 रुपये की रेड क्रॉस सहायता, मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र की प्रक्रिया में तेजी लाने और जमा की गई राशि को कानूनी वारिसों को जारी करवाने में मदद कर रहे हैं.

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By Arbindkumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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