गडकरी बोले- बच्चों को स्कूल में ही ट्रैफिक नियमों और सुरक्षित यात्रा के बारे में दी जाएगी जानकारी

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गडकरी बोले- बच्चों को स्कूल में ही ट्रैफिक नियमों और सुरक्षित यात्रा के बारे में दी जाएगी जानकारी

सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियान भी चलाती है. लेकिन अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने फैसला किया है कि बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम में ही ट्रैफिक नियमों और सुरक्षित यात्रा के बारे में जानकारी दी जा सके.

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, देश में हर साल सड़क दुर्घटना में हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ती है.

सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता अभियान भी चलाती है. लेकिन अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने फैसला किया है कि बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम में ही ट्रैफिक नियमों और सुरक्षित यात्रा के बारे में जानकारी दी जा सके.

इस बाबत केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स(सियाम) और केंद्रीय विद्यालय संगठन के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया. इस समझौते के तहत केंद्रीय विद्यालय के छात्रों को सड़क सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता की बाबत पढ़ाया जायेगा.

इस मौके पर अपनी आगामी सीरीज ‘गन्स एंड गुलाब’ पर अभिनेता राजकुमार राव ने कहा, मुझे लगता है कि उनकी (निर्माता राज और डीके) सोच, वे जो सामग्री बनाते और लिखते हैं वह लीक से हटकर है. यह बहुत अपरंपरागत है. कुछ ऐसा जो मुझे पसंद है. जब मैं कुछ नया और ताजा देखता हूं, तो मुझे बहुत खुशी होती है क्योंकि कोई कुछ ऐसा बनाने की कोशिश कर रहा है जो हमने पहले नहीं देखा है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में हाईवे पर ट्रकों और गाड़ियों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने के लिए एक नयी टेक्नॉलॉजी के बारे में जानकारी दी. दरअसल गडकरी से नॉमिनेटेडट सदस्य गुलाम अली ने एक्सीडेंट को लेकर सवाल पूछा, कश्मीर में सरकार काम तो कर रही है, लेकिन हाईवे पर ट्रक दुर्घटनाएं भी अधिक हो रही हैं.

एक्सिडेंट क्रैश बैरियर तो होता है, लेकिन ट्रक इतना बड़ा होता है कि टक्कर के बार न तो ट्रक का पता चलता है और न ही ड्राइवर का पता चलता है. इस सवाल पर गडकरी ने कहा, सच है कि पहाड़ी इलाकों में अधिक एक्सिडेंट होते हैं.

क्रैश बैरियर लोहे के बने होते थे, लेकिन अब नयी तकनीक आ गयी है. उन्होंने आगे बताया, नयी तकनीक में कंक्रीट में प्लास्टिक का एक गोल उपकरण लगा रहता है. इसमें ट्रक के टक्कर मारने पर वह नीचे नहीं गिरता, बल्कि पीछे की तरफ आ जाता है. इससे दुर्घटना को कम किया जा सकता है.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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