Niti Aayog: झारखंड को केंद्र खनन से होने वाली आय का 1.34 करोड़ बकाया जल्द कराये मुहैया

नीति आयोग द्वारा आयोजित 10वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में खनिज और कोयले के साथ साथ अन्य क्रिटिकल खनिजों की बहुतायत है. लेकिन खनन से होने वाला प्रदूषण और विस्थापन एक बहुत बड़ा मुद्दा है. खनन कंपनियों द्वारा ली गई भूमि जो कि (नॉन पेमेंट ऑफ लैंड कंपनसेशन) में आती है, जिसके ऊपर राज्य सरकार का 1.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक बकाया है. इसका भुगतान राज्य को जल्द से जल्द किया जाना चाहिए.

Niti Aayog: झारखंड को केंद्र खनन से होने वाली आय का 1.34 करोड़ बकाया जल्द कराये मुहैया

Niti Aayog: विकसित भारत की परिकल्पना विकसित राज्य से ही संभव है. इसके लिए विकसित गांव को जोड़ने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. झारखंड विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण, युवा कौशल, किसानों के विकास पर फोकस कर रहा है. साथ ही शिक्षा, आर्थिक, आधारभूत संरचना एवं तकनीकी विकास के क्षेत्र में सतत काम कर रही है. राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए लगभग 50 लाख महिलाओं को हर माह 2500 रुपये की राशि मुहैया करा रही है. नीति आयोग द्वारा आयोजित 10वी गवर्निंग काउंसिल बैठक को संबोधित करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह बात कही.

बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की. इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नीति आयोग के अध्यक्ष अमिताभ कांत और राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में खनिज और कोयले के साथ साथ अन्य क्रिटिकल खनिजों की बहुतायत है. लेकिन खनन से होने वाला प्रदूषण और विस्थापन एक बहुत बड़ा मुद्दा है. खनन कंपनियों द्वारा ली गई भूमि जो कि (नॉन पेमेंट ऑफ लैंड कंपनसेशन) में आती है  जो केंद्र के अधीन है उसपर राज्य सरकार का 1.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक बकाया है. इसका भुगतान राज्य को जल्द से जल्द किया जाना चाहिए. कोल बियरिंग एरिया(सीबीए) कानून में संशोधन कर खनन का काम पूरा होने के बाद कंपनियों को, भूमि राज्य सरकार को लौटाने का प्रावधान किया जाना चाहिए. राज्य में खनन के क्षेत्र में होने वाले अनधिकृत खनन के लिए कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.

कोल आधारित मिथेन गैस के दोहन को मिले प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोल आधारित मिथेल गैस की बहुतायत है, जिसका तकनीक के इस्तेमाल से ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग किया जा सकता है. इसके लिए राज्य में खनन कंपनियों को कैप्टिव प्लांट लगाने की अनिवार्यता होनी चाहिए और कुल उत्पादन का 30 फीसदी राज्य के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी होनी चाहिए. ऐसा करने से राज्य में रोजगार के अवसर पैदा होंगे. झारखंड में वन क्षेत्र में पूर्वोत्तर राज्यों की तरह है, लेकिन आधारभूत संरचना के लिए मंजूरी मिलने में देरी के कारण काम बाधित होता है. इसके लिए पूर्वोत्तर राज्यों को मिलने वाली विशेष सहायता झारखंड को भी मिलनी चाहिए. हवाई मार्ग के आवागमन के लिए प्रदेश का साहिबगंज जिला कार्गो हब की दृष्टि से बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकता है जो सीमावर्ती राज्यों को भी सुविधा प्रदान करेगा. इसी जिले में गंगा नदी पर अतिरिक्त पुल का निर्माण या उच्च स्तरीय बांध बनाना भी महत्वपूर्ण है. क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए स्ट्रेटेजिक इंपॉर्टेंट क्षेत्र में आधारभूत संरचना को प्राथमिकता देने के साथ राज्य में डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल माईनिंग कॉरिडोर विकसित करना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि  झारखंड सरकार ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजना शुरू की है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, मईया सम्मान योजना, अबुआ स्वास्थ्य योजना प्रमुख है. केंद्र सरकार की योजनाओं के मानदंड में कुछ बदलाव करने की जरूरत है ताकि राज्य सरकार 25 लाख परिवारों को 5 किलोग्राम चावल प्रतिमाह, आयुष्मान योजना से वंचित 28 लाख परिवारों को 5 लाख का स्वास्थ्य बीमा, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से वंचित 38 लाख गरीब परिवारों को 15 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिलावार हेल्थ प्रोफाइल तैयार कर सके. 


राज्य की जरूरतों के हिसाब से लागू हो केंद्रीय योजना

हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्रीय योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की बजाय राज्यों के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए. केंद्र सरकार की योजना जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना में समय के साथ वृद्धि होनी चाहिए. राज्य में लागू सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट के कारण निवेश प्रभावित हो रहा है. इसके लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. नक्सलवाद की समस्या से निवारण के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की प्रतिनियुक्ति से संबंधित शुल्क राज्य सरकार से लेने की प्रथा को बंद किया जाना चाहिए. राज्य में वर्ष 2014 से पहले 16 जिले नक्सल प्रभावित थे अब ऐसे जिलों की संख्या सिर्फ दो रह गयी है. पश्चिमी सिंहभूम एवं लातेहार तक नक्सलवाद सिमट गया है.

फिर भी विशेष केंद्रीय सहायता को सभी 16 जिले में लागू रखने की आवश्यकता है. कोरोना जैसी महामारी में विषम परिस्थिति उत्पन्न हुई जिससे प्रदेश के मजदूर राज्य के बाहर काम करते थे उनको सहायता राज्य सरकार की ओर से दी गयी. हाल ही में कैमरून में फंसे मजदूरों को राज्य सरकार ने अपने खर्च से वापस बुलाया, प्रदेश की महिलाएं जो बाहर काम करती है, उनपर होने वाले अत्याचार और मजदूर जो किसी दूसरे देश में काम करना चाहते है उनके वीजा ,सुरक्षा और व्यय में केंद्र सरकार की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए.  

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Published by: Vinay tiwari

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