NEET Exam : CBI जांच कराने की याचिका पर NTA और सरकार को नोटिस, सभी याचिकाओं पर 8 जुलाई को सुनवाई

नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि काउंसलिंग की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई जाएगी. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है.

NEET-UG 2024 : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 14 जून को नीट यूजी परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच सीबीआई से कराने और पेपर लीक से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से संबंधित सभी याचिकाओं पर सुनवाई आठ जुलाई को करने की बात कही है, साथ ही कोर्ट ने काउंसलिंग पर रोक नहीं लगाने की बात भी दोराई. गौरतलब है कि नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर परीक्षा रद्द करने और मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए कई याचिकाएं दायर की गई हैं.

ग्रेस मार्क्स रद्द

गौरतलब है कि 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की थी और यह कहा था कि नीट की काउंसलिंग को रोका नहीं जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और परीक्षा का आयोजन बड़े स्तर पर होता है, इसलिए किसी को घबराने की जरूरत नहीं है. वहीं एनटीए ने कोर्ट में यह कहा था कि उसने 1563 बच्चों के स्कोर कार्ड को रद्द कर दिया है. साथ ही ग्रेस मार्क्स को खत्म कर उनकी दोबारा परीक्षा लेने की बात भी एनटीए ने कही थी. ग्रेस मार्क्स पाने वाले बच्चों की दोबारा परीक्षा 23 जून को होगी और 30 जून को रिजल्ट घोषित होगा. जो बच्चे परीक्षा नहीं देंगे, उन्हें बिना ग्रेस मार्क्स के ही अंक मिलेंगे.

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धर्मेंद्र प्रधान ने दी क्लीन चिट

नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनटीए एक प्रामाणिक संस्था है और पेपरलीक के कोई सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए एनटीए की विश्वसनीयता पर सवाल बेकार हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि किसी बच्चे को घबराने की जरूरत नहीं है, सरकार उन्हें न्याय दिलााने के लिए प्रतिबद्ध है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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