NEET 2024 : एनटीए ने रद्द किया 1563 बच्चों का स्कोरकार्ड, दोबारा ली जाएगी परीक्षा, लेकिन काउंसलिंग पर रोक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि वह NEET-UG 2024 की काउंसलिंग पर रोक नहीं लगाएगा, इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन एनटीए ने ग्रेस मार्क्स हटाने की बात कही है.

NEET 2024: सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि काउंसलिंग पर रोक नहीं लगाया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी रहेगी, जब परीक्षा होती है तो सबकुछ समग्रता से होता है इसलिए किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है. वहीं एनटीए ने कोर्ट में कहा कि वह ग्रेस मार्क्स हटा रहा है और जिन बच्चों को ग्रेस मार्क्स दिया गया था उनकी परीक्षा दोबारा ली जाएगी, जो परीक्षा नहीं देंगे उन्हें बिना ग्रेस वाला मार्क्स ही दिया जाएगा. एनटीए ने बताया कि 1563 बच्चों का स्कोर कार्ड रद्द कर दिया गया है, इन्हें दोबारा परीक्षा देने होगी. एनटीए दोबारा होने वाली परीक्षा का परिणाम 30 जून तक जारी करेगा.

गौरतलब है कि 4 जून को एनटीए ने नीट यूजी परीक्षा का रिजल्ट जारी किया था. परीक्षा परिणाम आने के बाद विवाद और बढ़ गया क्योंकि 67 बच्चों को कुल अंक 720 मिले थे. ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि कई बच्चों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे. ग्रेस मार्क्स दिए जाने की वजह से कई बच्चे जो मेरिट में थे उन्हें एम्स और अन्य प्रतिष्ठित काॅलेजों में दाखिला नहीं मिलने लगा. कोचिंग देने वाली प्रमुख संस्था फिजक्सवाला ने भी पेपरलीक और ग्रेस मार्क्स के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. नीट परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें ग्रेस मार्क्स, री-एग्जाम और परीक्षा को रद्द किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर 13 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि काउंसलिंग पर रोक नहीं लगाई जाएगी. वहीं एनटीए ने कोर्ट में यह स्पष्ट किया कि वह सिर्फ उन्हीं की परीक्षा दोबारा लेगी जिन्हें ग्रेस मार्क्स दिया गया है. एनटीए ने विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली और पेपर चेकिंग के पूरे पैटर्न की जानकारी भी दी थी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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