नेवल लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ने पहली बार आईएनएस विक्रांत से भरी उड़ान, देखें इसकी खासियत

आईएनएस विक्रांत पर एलसीए (नौसेना) की लैंडिंग को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है. यह स्वदेशी लड़ाकू विमान के साथ स्वदेशी विमान वाहक को डिजाइन, विकसित, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है.

भारत के स्वदेश विकसित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए-नेवी) को सोमवार को विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर उतारा गया, जिसे नौसेना ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है. नौसेना ने कहा कि उसके पायलट ने विमान को पोत पर उतारा.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में साबित हुआ मील का पत्थर

आईएनएस विक्रांत पर एलसीए (नौसेना) की लैंडिंग को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है. यह स्वदेशी लड़ाकू विमान के साथ स्वदेशी विमान वाहक को डिजाइन, विकसित, निर्माण और संचालित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है. नौसेना ने बयान में कहा, नौसेना के पायलटों द्वारा एलसीए (नेवी) को आईएनएस विक्रांत पर उतारे जाने के साथ भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. नौसेनाध्यक्ष के एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा, भारत के पहले स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर पर स्वदेशी LCA नेवी की सफल लैंडिंग और टेक-ऑफ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के हमारे सामूहिक विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

सितंबर में पीएम मोदी ने आईएनएस विक्रांत को नौसेना में किया था शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल भारत के प्रथम स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना की सेवा में शामिल किया था.

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क्या है आईएनएस विक्रांत की खासियत

आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा है. इसकी ऊंचाई 61 मीटर है और इसका फ्लाइट डेक 12,500 वर्ग मीटर है. जिसकी अधिकतम गति 28 समुद्री मील है. विक्रांत भारतीय नौसेना द्वारा संचालित होने वाला चौथा विमानवाहक पोत है. 1961 से 1997 तक पहला विक्रांत (ब्रिटिश मूल), 1987 से 2016 तक आईएनएस विराट (ब्रिटिश मूल) और 2013 से आईएनएस विक्रमादित्य.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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