राष्ट्रीय दलों को पिछले 14 साल में 11,234 करोड़ रुपये का चंदा अज्ञात स्रोतों से मिला

देश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को वित्तवर्ष 2004-05 से 2018-19 के बीच 11,234 करोड़ रुपये का चंदा अज्ञात स्रोतों से प्राप्त किया. गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर)ने यह दावा किया है .

नयी दिल्ली : देश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को वित्तवर्ष 2004-05 से 2018-19 के बीच 11,234 करोड़ रुपये का चंदा अज्ञात स्रोतों से प्राप्त किया. गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर)ने यह दावा किया है . एडीआर ने बताया कि इस विश्लेषण के लिए उसने सात राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा)और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी का इस्तेमाल किया है. अज्ञात स्रोतों से आय का अभिप्राय आयकर रिटर्न में घोषित उस राशि से है जिसमें दानकर्ता के नाम की जानकारी नहीं होती और दान की राशि 20,000 से कम है.

अज्ञात स्रोतों में चुनावी बांड, कूपन की बिक्री, राहत कोष, विविध आय, स्वैच्छिक योगदान और बैठक और मोर्चा में दिए गए योगदान की राशि शामिल है. बसपा ने हालांकि, घोषित किया कि उसे स्वैच्छिक योगदान (20,000 रुपये से कम या अधिक राशि) राशि कूपन बिक्री, चुनावी बांड या अज्ञात स्रोतों से कोई आय नहीं हुई. एडीआर ने कहा, ‘‘वित्तवर्ष 2004-05 से 2018-19 के बीच राष्ट्रीय पार्टियों ने 11,234.12 करोड़ रुपये की राशि अज्ञात स्रोतों से प्राप्त की है.

इस राशि को देने वाले दानकर्ताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. एडीआर ने बताया कि वर्ष 2018-19 में भाजपा ने 1,612.04 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोत से मिलने की घोषणा की थी. यह राष्ट्रीय दलों को अज्ञात स्रोतों से मिली कुल राशि (2,512.98 करोड़) का 64 प्रतिशत है. संगठन ने बताया कि अन्य पांच राष्ट्रीय पार्टियों को अज्ञात स्रोतों से मिली राशि का डेढ़ गुना अधिक है.

एडीआर के मुताबिक कांग्रेस ने 728.88 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोतों से मिलने की घोषणा की है और यह राष्ट्रीय पार्टियों को अज्ञात स्रोतों से मिली कुल राशि का 29 प्रतिशत है. इसके मुताबिक कांग्रेस और राकांपा को वित्तवर्ष 2004-05 से 2018-19 के बीच संयुक्त रूप से कूपन की बिक्री से 3,902.63 करोड़ रुपये की आय हुई.

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Author: Pritish Sahay

Published by: Prabhat Khabar

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