PM Modi @ 76: 2047 के उभरते भारत का दस्तावेज, 17 सितंबर को जन्मदिन पर पढ़ें प्रभात प्रकाशन की कहानी

PM Modi Birthday 2026: 17 सितंबर को नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. जानिए प्रभात प्रकाशन के निदेशक पीयूष कुमार के अनुसार नरेंद्र मोदी से जुड़ी पुस्तकों की लंबी प्रकाशन-यात्रा और 2047 के विकसित भारत से जुड़े विमर्श में इनका महत्व.

किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व का मूल्यांकन केवल उसके राजनीतिक जीवन से नहीं होता. उसके विचार, लेखन, भाषण, सामाजिक सरोकार और उस दौर पर लिखे गए साहित्य भी इतिहास को समझने का माध्यम बनते हैं. नरेंद्र मोदी से संबंधित पुस्तकों का एक बड़ा संकलन इसी दृष्टि से देखा जा सकता है.

प्रभात प्रकाशन के निदेशक पीयूष कुमार के अनुसार, नरेंद्र मोदी से संबंधित पुस्तकों को प्रकाशित करने की उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल किसी व्यक्तित्व को प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि समकालीन भारत के एक महत्त्वपूर्ण दौर से जुड़े विचारों और विमर्श को पुस्तक के स्थायी माध्यम में दर्ज करना रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (photo/X)

1999 से शुरू हुई एक प्रकाशन-स्मृति

पीयूष कुमार अपने प्रकाशकीय अनुभव की एक व्यक्तिगत स्मृति साझा करते हुए बताते हैं कि वर्ष 1999 से 2001 के बीच नरेंद्र मोदी स्वयं प्रकाशन कार्यालय आया करते थे और अपनी पुस्तकों के संपादन तथा परिमार्जन की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते थे.

लेखक और प्रकाशक के बीच होने वाले संवाद, पांडुलिपि पर चर्चा और शब्दों के चयन से जुड़े वे क्षण उनके अनुसार इस प्रकाशन-यात्रा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा रहे.

प्रभात प्रकाशन की वेबसाइट भी नरेंद्र मोदी को अपने प्रकाशित लेखकों में शामिल करती है और प्रकाशन समूह के साथ उनके लेखन की दीर्घ अवधि की मौजूदगी को दर्शाती है.

नरेंद्र मोदी पर नहीं, नरेंद्र मोदी के माध्यम से एक दौर को पढ़ने की कोशिश

नरेंद्र मोदी से संबंधित साहित्य की प्रकृति एक जैसी नहीं है. इसमें स्वयं नरेंद्र मोदी की लिखी पुस्तकें हैं, उनके विचारों पर केंद्रित सामग्री है और नेतृत्व, विकास, सामाजिक सरोकार तथा राजनीतिक यात्रा को अलग-अलग कोणों से देखने वाली पुस्तकें भी हैं.

प्रभात प्रकाशन के उपलब्ध साहित्य में ‘ज्योतिपुंज’ और ‘सेतुबंध’ जैसी नरेंद्र मोदी की पुस्तकों के संस्करण शामिल हैं. प्रकाशक की वेबसाइट ‘ज्योतिपुंज’ को नरेंद्र मोदी द्वारा लिखित पुस्तक के रूप में दर्ज करती है. वहीं ‘सेतुबंध’ का 2025 संस्करण भी नरेंद्र मोदी के नाम से प्रकाशित है.

इस तरह यह साहित्य किसी एक शैली तक सीमित नहीं रहता. कहीं आत्मचिंतन है, कहीं सामाजिक विचार, कहीं संगठन और नेतृत्व का विमर्श और कहीं बदलते भारत की चर्चा.

पीयूष कुमार (निदेशक) प्रभात प्रकाशन प्रा.लि.

‘सामाजिक समरसता’ से ‘विकसित भारत’ तक

पीयूष कुमार के अनुसार, नरेंद्र मोदी से संबंधित प्रकाशन-सूची को केवल चुनाव, राजनीति या राजनीतिक जीवनी तक सीमित करके देखना उसके दायरे को छोटा करना होगा.

इस साहित्य में सामाजिक समरसता, सामाजिक चेतना, महिला सशक्तीकरण, भारतीय मुस्लिम समाज, आत्मनिर्भरता, मध्यम वर्ग, अमृतकाल और विकसित भारत जैसे विषयों को भी जगह मिली है.

इसी व्यापक दायरे में ‘सामाजिक समरसता’, ‘साक्षी भाव’, ‘मन की बात : सामाजिक चेतना का अग्रदूत’, ‘नरेंद्र मोदी के पाँच प्रण’, ‘मोदी दशक : विकसित भारत की आधारशिला’, ‘भारत का अमृतकाल’, ‘नया भारत समर्थ भारत’ और ‘विकास की राजनीति’ जैसे शीर्षक सामने आते हैं.

इन पुस्तकों को साथ रखकर देखने पर एक दिलचस्प बात सामने आती है- नरेंद्र मोदी से जुड़ा साहित्य केवल व्यक्ति-केंद्रित नहीं है. इसके साथ उस समय के सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को समझने की कोशिश भी जुड़ी हुई है.

‘मोदी मैनेजमेंट’ से नेतृत्व की भाषा तक

नरेंद्र मोदी पर प्रकाशित साहित्य का एक दूसरा बड़ा हिस्सा नेतृत्व और कार्यशैली से संबंधित है.

‘मोदी मैनेजमेंट’, ‘मोदीजी की पाठशाला’, ‘100 मोदी मंत्र’, ‘विकास-शिल्पी : नरेंद्र मोदी’ और ‘विश्वकर्मा मोदी : नए भारत के योजनाशिल्पी’ जैसे शीर्षक नेतृत्व, संगठन, लक्ष्य निर्धारण और कार्य-संस्कृति को केंद्र में रखते हैं.

युवा पाठकों के लिए इन पुस्तकों को पढ़ने का एक तरीका यह भी हो सकता है कि वे किसी राजनीतिक व्यक्तित्व को केवल राजनीतिक संदर्भ में न देखें, बल्कि नेतृत्व से जुड़े व्यापक प्रश्नों के संदर्भ में भी पढ़ें—निर्णय कैसे लिए जाते हैं? संगठन कैसे काम करते हैं? लक्ष्य किस तरह निर्धारित होते हैं? संवाद और जनसंपर्क की भूमिका क्या होती है?

यह दृष्टिकोण पाठक को निष्कर्ष देने के बजाय प्रश्नों के साथ पुस्तक के सामने छोड़ता है.

पुस्तकें क्यों बनती हैं किसी दौर का दस्तावेज?

समय के साथ राजनीतिक घटनाएँ पुरानी हो जाती हैं, लेकिन उनसे जुड़े दस्तावेज भविष्य के शोध और सार्वजनिक विमर्श के लिए सामग्री बने रहते हैं.

यही कारण है कि किसी समकालीन नेता से जुड़ी पुस्तकें केवल उस व्यक्ति की जीवनी सामग्री नहीं होतीं. वे अपने समय के शब्दों, बहसों, उम्मीदों और असहमतियों को भी दर्ज करती हैं.

नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन कई दशकों में फैला है. गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने तक उनकी राजनीतिक यात्रा कई अलग-अलग चरणों से गुजरी है.

ऐसे में उनके बारे में उपलब्ध साहित्य को अलग-अलग कालखंडों और विषयों के संदर्भ में पढ़ना समकालीन भारत को समझने का एक तरीका हो सकता है.

2047 और ‘विकसित भारत’ का विमर्श

भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने का लक्ष्य वर्ष 2047 है. इस संदर्भ में ‘विकसित भारत’ आज के सार्वजनिक विमर्श का एक प्रमुख विषय है.

नरेंद्र मोदी से संबंधित प्रकाशनों में भी अमृतकाल, विकसित भारत, आत्मनिर्भरता और नए भारत जैसे विषय दिखाई देते हैं. इसलिए इन पुस्तकों को केवल अतीत का साहित्य मानना पर्याप्त नहीं होगा। इनमें भविष्य के भारत को लेकर व्यक्त विचार भी शामिल हैं.

हालांकि किसी भी ऐसे साहित्य को पढ़ते समय यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि किसी पुस्तक में व्यक्त विचार लेखक या प्रकाशक के दृष्टिकोण हो सकते हैं; उन्हें स्वतः ऐतिहासिक तथ्य या सर्वमान्य निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए.

यही पुस्तक-पठन की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता भी है—पाठक सामग्री पढ़ता है, संदर्भ देखता है, दूसरे स्रोतों से तुलना करता है और फिर अपना निष्कर्ष बनाता है.

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प्रकाशक की भूमिका क्या है?

पीयूष कुमार के अनुसार, प्रकाशक की भूमिका केवल किसी व्यक्तित्व की प्रशंसा प्रकाशित करना नहीं, बल्कि अध्ययन के लिए सामग्री उपलब्ध कराना भी है.

नरेंद्र मोदी से जुड़ी प्रभात प्रकाशन की पुस्तक-यात्रा को वे इसी संदर्भ में देखते हैं. इसमें स्वयं नरेंद्र मोदी का लेखन है, उनके विचारों पर आधारित सामग्री है, नेतृत्व और प्रबंधन से जुड़े अध्ययन हैं तथा सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित पुस्तकें हैं.

प्रभात प्रकाशन स्वयं को विभिन्न विधाओं में छह दशकों से अधिक समय से पुस्तकें प्रकाशित करने वाला प्रकाशन समूह बताता है और उसकी वेबसाइट पर नरेंद्र मोदी सहित अनेक समकालीन लेखकों के नाम दर्ज हैं.

17 सितंबर: जन्मदिन से आगे, एक साहित्यिक पड़ाव

17 सितंबर को नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है. लेकिन उनके जन्मदिन को केवल राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखने के बजाय उनके नाम से जुड़े साहित्य को भी देखा जा सकता है.

किताबों के जरिए एक सवाल सामने आता है- किसी नेता को समझने के लिए केवल उसके भाषण और राजनीतिक फैसले पर्याप्त हैं, या उसके विचारों, लेखन और उस पर लिखे गए साहित्य को भी साथ पढ़ना चाहिए?

शायद इसी सवाल का उत्तर नरेंद्र मोदी से संबंधित पुस्तकों की लंबी श्रृंखला में मिलता है.

पीयूष कुमार के शब्दों में, इस प्रकाशन-यात्रा की मूल भावना यही रही है कि एक महत्त्वपूर्ण समकालीन व्यक्तित्व और उसके समय से जुड़े विचारों, अनुभवों, बहसों और विमर्श को पुस्तक के स्थायी माध्यम से वर्तमान पाठकों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाए.

इस दृष्टि से नरेंद्र मोदी साहित्य को केवल एक व्यक्ति से संबंधित पुस्तकों का संग्रह नहीं, बल्कि समकालीन भारत और 2047 की ओर बढ़ते भारत के विचार-विमर्श को दर्ज करने वाले एक प्रकाशकीय दस्तावेज के रूप में पढ़ा जा सकता है.

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, Geopolitical Analyst, UPSC Educator और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं (जैसे Pratiyogita Darpan) में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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