Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोल गए सांसद हनुमान बेनीवाल! संसद में खूब लगे ठहाके

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने हिस्सा लिया. उन्होंने ऑपरेशन पर सरकार को घेरने की कोशिश की. सांसद हनुमान बेनीवाल ने सदन में अपनी बात रखते ऑपरेशन के नामकरण को लेकर सवाल उठाए. उनकी बात पर सदन में जमकर ठहाके लगे.

Operation Sindoor: लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केन्द्र सरकार को घेरने की कोशिश की. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार पर कटाक्ष किया. उनकी बात सुनकर सदन में जमकर ठहाके लगे. बेनीवाल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के नाम से यही जाहिर होता है भारत पाकिस्तान की मांग में सिंदूर भरने जा रहा है. सांसद ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से लगा कि पाकिस्तान भारत की पत्नी हो गई.

पाकिस्तान हो गई भारत की पत्नी!- सांसद बेनीवाल

सांसद बेनीवाल ने कहा ’22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम की घटना को अंजाम दिया. 8 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया. यह कहा गया कि पाकिस्तान घुटनों के बल आ गया. मीडिया रिपोर्ट्स में पाकिस्तान के शहर और पोर्ट पर कब्जे वाली बात भी सामने आने लगी ऐसा लगा कि इस्लामाबाद में झंडा फहराने वाले हैं. हमने कहा हो गया काम.’ उन्होंने कहा ‘आपने नाम भी सिंदूर रखा. ऐसा लग रहा था भारत पाकिस्तान की मांग में सिंदूर भर रहा है. ऐसे में पाकिस्तान तो भारत की पत्नी हो गई, बस विदाई बाकी है’. बेनीवाल की बात पर पूरे सदन में ठहाके लगने लगे.

सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

सांसद हनुमान बेनीवाल ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह घृणित कार्य पाकिस्तानी आतंकवादियों की तरफ से किया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से चूक हमारे ही सिस्टम में कहीं हो गई. उन्होंने कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर हत्या की गई. यह बेहद ही निंदनीय था. उन्होंने कहा कि आतंकी वहां तक कैसे पहुंच गए? वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम थे.

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लेखक के बारे में

Published by: Pritish sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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