SIMI: आतंकवादी संगठन SIMI पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, पांच साल के लिए बढ़ाया प्रतिबंध

गृह मंत्री कार्यालय ने सिमी पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी साझा करते हुए एक्स पर लिखा, आतंकवाद के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी के जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण के तहत ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)’ को यूएपीए के तहत पांच साल की अगली अवधि के लिए ‘गैरकानूनी संघ’ घोषित किया गया है.

‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)’ पर केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. आतंकी संगठन पर पांच साल के लिए प्रतिबंध बढ़ा दिया गया है. इसको लेकर गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिमी पर प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर ट्वीट किया और बताया, मोदी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की है.

गृह मंत्री कार्यालय ने सिमी पर प्रतिबंध बढ़ाने को लेकर क्या किया ट्वीट

गृह मंत्री कार्यालय ने सिमी पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी साझा करते हुए एक्स पर लिखा, आतंकवाद के खिलाफ पीएम नरेंद्र मोदी के जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण के तहत ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी)’ को यूएपीए के तहत पांच साल की अगली अवधि के लिए ‘गैरकानूनी संघ’ घोषित किया गया है.


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सिमी पर केंद्र सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध

सिमी को भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को खतरे में डालने के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में शामिल पाया गया है.

क्या है सिमी और उसका उद्देश्य

स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है. जिसकी स्थापना अप्रैल 1977 में हुआ था. जिसके संस्थापक अध्यक्ष मोहम्मद अहमदुल्ला सिद्दीकी थे. हालांकि बताया जाता है कि सिमी की स्थापना पहले ही हो गई थी. 1956 में बने प्रतिबंधित संगठन जमात ए इस्लामी को ही नया रूप देकर सिमी बनाया गया.

9/11 हमले के बाद सरकार ने सिमी पर लगाया था बैन

9/11 हमले के बाद भारत सरकार ने 2001 में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने यह कार्रवाई आतंकवादरी संगठन के साथ संबंध होने पर लगाया था. हालांकि अगस्त 2008 में एक विशेष न्यायाधिकरण द्वारा प्रतिबंध हटा दिया गया था. लेकिन फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और सिमी पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया है.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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