विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि अबतक 98 हजयात्रियों की हुई मौत, प्राकृतिक आपदा और बीमारी हैं कारण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अधिकतर हज यात्रियों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है.

Hajj pilgrims : भारतीय हज यात्रियों की मौत पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस साल अबतक 175,000 हजयात्री मक्का गए थे, जिनमें से 98 हजयात्रियों की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि अधिकतर हजयात्रियों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, कुछ यात्रियों की मौत गंभीर बीमारी और बुढ़ापे की वजह से भी हुई है. अराफत यानी हजयात्रा के दूसरे दिन छह भारतीयों की मौत हुई और चार भारतीयों की मौत दुर्घटना की वजह से हुई. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले साल 187 भारतीय हाजियों की मौत हुई थी.

मक्का में 1000 से अधिक हजयात्रियों की मौत

मक्का में 1000 से अधिक हजयात्रियों की मौत की सूचना है, जिसके बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी. सऊदी अरब में पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से हजयात्रियों को काफी परेशानी हो रही है. कई वृद्ध लोग भीषण गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और उनकी मौत हो जा रही है. मक्का में तापमान 52 डिग्री से अधिक है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस अवसर पर कई अन्य मुद्दों पर भी बात की. फ्रांसिसी पत्रकार के वीजा खत्म होने के कारण देश छोड़ने के मामले पर रणधीर जायसवाल ने कहा कि वह पत्रकार ओसीआई कार्ड धारक हैं. जो भी व्यक्ति ओसीआई कार्ड धारक हैं, उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए वर्क परमिट की जरूरत होती है. उन्होंने मई 2024 में आवेदन किया था और अभी उसपर फैसला नहीं हुआ है.

सीमा पर शांति चाहता है भारत

गलवान घाटी के मसले पर बात करते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम यह चाहते हैं कि सीमा पर शांति हो और इसके लिए हम प्रयास भी करते हैं. गलवान के मसले पर चीन के साथ दो स्तर पर बातचीत हो रही है. एक सैन्य स्तर पर और दूसरे राजनीतिक स्तर पर. हर समस्या का समाधान बातचीत से संभव है और हम गलवान में भी यह चाहते हैं. गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सेना के जांबाजों ने विफल कर दिया था. इस हमले में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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