तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार (30 मई) को आरोप लगाया कि दक्षिण 24 परगना में हमले के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के इलाज को प्रभावित करने की कोशिश की गई. उन्होंने दावा किया कि अस्पतालों और डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया ताकि अभिषेक को भर्ती न किया जाए. ममता ने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप करार देते हुए राज्य की बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.
अभिषेक बनर्जी के इलाज का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने अस्पताल की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में भर्ती की जरूरत नहीं थी, तो उन्हें पहले आईटीयू में क्यों रखा गया ? करीब दो घंटे तक निगरानी में क्यों रखा गया और कई मेडिकल जांच व स्कैन कराने की सलाह क्यों दी गई? ममता ने इस मामले में पारदर्शिता की मांग की.
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चेहरे, पीठ, छाती पर चोट के निशान
ममता बनर्जी ने कहा कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को रात करीब 8:15 बजे से 11 बजे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया, जिसके बाद उन्हें छुट्टी दी गई. उनके मुताबिक, डॉक्टरों ने चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर कई चोटों के निशान पाए थे. हड्डी टूटने या अंदरूनी चोट की आशंका को खारिज करने के लिए कई जांच और स्कैन कराने की सलाह भी दी गई थी. ममता ने सवाल उठाया कि दौरे की पूर्व जानकारी होने के बावजूद पुलिस सुरक्षा में चूक कैसे हुई.
अभिषेक के साथ क्या हुआ?
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शनिवार को सोनारपुर में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया. जैसे ही अभिषेक बनर्जी वहां पहुंचे, बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने लगे. आरोप है कि कुछ लोगों ने उन पर पत्थर और अंडे फेंके, जबकि कुछ ने लात-घूंसे मारने की भी कोशिश की. हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने अभिषेक को सुरक्षित निकालने के लिए उनके चारों ओर मानव शृंखला बना ली.
